DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अमेरिका : हिंदी का बढ़ता दायरा

जोएल ली कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में पढ़ते-पढ़ाते हैं। इनके हिन्दी-उर्दू प्रेम से मैं तब से प्रभावित था जब पिछले साल वह मुझसे पटना और दिल्ली में मिले थे। वह भारत के दलित मुसलमानों पर रिसर्च कर रहे हैं। पहली बार जब मिले थे तो मैंने उन्हें सलाह दी थी कि वह मेरी पुस्तक ‘मसावात की जंग’ का अंग्रेजी अनुवाद पढ़ लें। इतना कहना था कि उन्होंने अपने बैग से मसावात की जंग का हिन्दी संस्करण निकाला और बताया कि वह इसे पढ़ चुके हैं।

पिछले महीने जब मैं भारत के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क में था तो जोएल से मिलने और कोलम्बिया यूनिवर्सिटी देखने की इच्छा हुई। बस दो घंटे का समय था इसलिए तय हुआ कि एक-एक कर क्या देखेंगे, जोएल के घर जाकर भी उनके बीवी-बच्चों से मिलना था।

जोएल के मुंह से ही सुन रखा था कि यूनिवर्सिटी के सोशल साईंस लाइब्रेरी में बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर की मूर्ति लगी है। हम लोग उसी तरफ बढ़ रहे थे कि हाथ में बैग लटकाए एक व्यक्ति को जाते देख जोएल चिल्लाएं- ये तो बिहार के प्रो. राकेश रंजन हैं, यहां हिन्दी पढ़ाते हैं। उनसे खड़े-खड़े थोड़ी बातें भी हुईं लेकिन उन्होंने अफसोस जताया कि उनका क्लास शुरू होने वाली है। फिर उन्होंने पूछा कि क्या आप लोग मेरे साथ क्लास रूम में चल सकते हैं, जहां हम अपने छात्र-छात्राओं से भी आपको मिलाते। हम लोग अनायास उनके पीछे चल दिए। सीढ़ियां चलकर चार तल्ला नीचे एक क्लास रूम में वह हमें ले गए।

पूछने पर प्रो. राकेश रंजन ने बताया कि स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर के तहत यह क्लास चलती है और इस क्लास में फिलहाल 17 स्टूडेंट्स हैं जिनमें 6 लड़के हैं। यह दो सेमेस्टर में एक साल का कोर्स है। प्रो. रंजन ने बताया कि यहां हिंन्दी के सांस्कृतिक, सामाजिक संदर्भ से वाकिफ बच्चों ही मुख्य रूप से आते हैं। हमारा काम उन्हें भाषाई संदर्भ देना होता है। उन्होंने यह भी बताया कि वैसे इस यूनिवर्सिटी में हिन्दी-उर्दू विभाग पिछले 30 साल से कार्यरत हैं। लेकिन कम समय में हिन्दी की पढ़ाई का यह नया कोर्स शुरू हुआ है जो सप्ताह में चार दिन चलता है।

प्रो. रंजन ने जोएल से मेरा परिचय बोर्ड पर लिखने को कहा। बोर्ड, अलग-अलग रंग के पेंसिल, डस्टर सब कुछ इलेक्ट्रॉनिक थे। मैंने कई छात्रों से पूछा कि आप हिन्दी क्यों पढ़ना चाहते हैं? सब्रिना टाइम्स ऑफ इंडिया मुम्बई में कुछ दिन काम कर चुकी हैं। खैरलांजी की रिपोर्टिग उसने की थी। वह फिर भारत में काम करना चाहती हैं। इसके लिए हिन्दी जरूरी है। शिवानी कैलिफोर्निया की है। उसके माता-पिता मूल रूप से गुजराती हैं। वह हिन्दी समझ तो लेती है लेकिन बोलने-पढ़ने के लिए यहां आ रही है।

योमारी कहती है कि हिन्दी फिल्में उसे बहुत पसंद हैं और यहीं से इस भाषा को सीखने की इच्छा हुई। दीपिका को तो बिहार आना है। उसे बिहार रूरल लाइवलीहुड नाम से एक एनजीओ का प्रोजेक्ट मिला है। अजीत सिंह कैलिफोर्निया से हैं, मगर वह मूल रूप से पंजाबी है। यहां पंजाबी इतिहास विषय पर पीएचडी कर रहे हैं। इनका कहना है कि पंजाब के लोगों को पंजाबी-हिन्दी-उर्दू तीनों से मोहब्बत है। साहिल मूल रूप से मुम्बई के हैं एवं हांगकांग में रहते हैं। इन्होंने मुझसे भी सवाल पूछ लिया कि आप कांग्रेस या बीजेपी में से किस पार्टी के हैं?

मैं कुछ बोलता कि इके पहले प्रो. राकेश रंजन ने कहा कि अनवर साहब दोनों में से किसी के नहीं हैं। हमारे बिहार में एक पार्टी है जेडीयू। वहां नीतीश बाबू मुख्यमंत्री हैं, उन्हीं की पार्टी के हैं यह। इन्हीं शब्दों के साथ प्रो. राकेश रंजन ने हमें विदा किया।

लिफ्ट से ऊपर आकर हम लोग सोसल साईंस लाइब्रेरी भवन देखने गए जहां अम्बेडकर साहब की मूर्ति लगी है। अम्बेडकर कोलम्बिया यूनिवर्सिटी उच्च शिक्षा के लिए आए थे और 1928 में उन्हें यहां से पीएचडी की उपाधि मिली थी। जोएल ने बताया कि यहां हर साल अम्बेडकर जयंती मनाई जाती है।

इसके बाद हम जोएल के घर पहुंचे। जहां जोएल की बेगम जोयेना ने गोद में अपने छह माह के बेटे लियो के साथ हमारी अगवानी की। चाय-नाश्ते के बीच में जो ने बताया कि उसका जन्मदिन 15 अगस्त है यानी जिस दिन भारत आजाद हुआ था। हम जाने के लिए उठ खड़े हुए। जोएल ने कहा- जोयना-लीयो से मिल लीजिए। हम लोग बाथरूम में गए जहां गुनगुने पानी के टब में लीयो को डाले योजना कुछ गुनगुना रही थी। फिर जोएल ने उसमें अपनी कुछ ऊंची आवाज मिलाकर गाना शुरू किया-
‘सर जो तेरा चकराए या दिल डूबा जाए,
आजा प्यारे पास हमारे काहे घबराए’

लेखक राज्यसभा सांसद हैं

alianwar3@rediffmail.com

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अमेरिका : हिंदी का बढ़ता दायरा