अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सोनिया ने जारी किया के.के.बिरला स्मारक डाक टिकट

संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जाने-माने उद्योगपति और राज्यसभा के सांसद स्वर्गीय डा. कृष्ण कुमार बिरला की स्मृति में शुक्रवार को यहां गांधी स्मृति में पांच रुपये मूल्य का डाक टिकट और प्रथम दिवस आवरण जारी किया। उन्होंने डा. बिरला को एक महान उद्योगपति और समाजसेवी बताया और कहा कि वह लंबे समय तक गांधीजी के संपर्क में रहे और अपने जीवन में गांधीजी की विचारधारा को उतारा। बिरला जी की आत्मकथआ ‘ब्रशेस विद हिस्ट्री’ एक एसा दस्तावेज हो जो स्वाधीनता संग्राम की गाथा को बयान करता है। कांग्रेस के प्रति बिरला जी की निष्ठा का जिक्र करते हुए सोनिया ने कहा कि 1में जब श्रीमती गांधी चुनाव हार गईं ओर तमाम सहयोगी कन्नी काटने लगे थे, तब बिरला जी ने अपनी निष्ठा बरकरार रखी और पूरी तरह उनके साथ रहे। सांसद के नाते उन्होंने अपनी छाप छोड़ी और अब उनकी पुत्री शोभना भरतिया पिता की परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। राज्य सभा सांसद श्रीमती शोभना भरतिया ने बताया कि उनके पिता ने आजीवन नैतिक मूल्यों की कद्र की और सदैव गांधी जी के विचारों को आत्मसात किया। स्मरण रहे कि करीब छह माह पूर्व डा. बिरला का निधन हो गया था। अपने पिता को याद करते हुए श्रीमती भरतिया ने कहा कि बिरला जी नेहरु-गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों से जुड़े रहे। समारोह में विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी, संचार राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, श्री बी.के.बिरला और कई मंत्री और गण्यमान्य व्यक्ित भी मौजूद थे। मुख्य अतिथि विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि वह पिछले चार दशकों से बिरला जी के संपर्क में रहे और बिरला जी के व्यक्ितत्व से काफी प्रभावित हुए। बिरला जी ने राज्य सभा के सांसद के नाते भी एक अमिट छाप छोड़ी। जब वह संसद में बोलते थे तो सभी बड़ी गंभीरता से उनकी बातें सुनते थे। वह एक उद्योगपति और सांसद ही नहीं बल्कि एक शिक्षाविद भी थे और ज्ञान-विज्ञान के प्रसार के लिए कई संस्थानों की स्थापना की। संचार व सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बिरला जी के साथ अपने निजी और पारिवारिक संबंधों का जिक्र करते हुए बताया कि बिरला जी समय के पाबंद थे और अपनी सहाता तथा मिलनसारिता के लिए जाने जाते थे। उद्योगपति होने के साथ ही उन्होंने समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। उन्होंने पिलानी में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलोजी व साइंस जसा संस्थान स्थापित किया जिसकी शाखाएं अब हैदराबाद और दुबई में भी हैं। उनके पिता घनश्याम दास बिरला गांधी जी के करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: के के बिरला पर स्मारक डाक टिकट जारी