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गैजेट में बढ़ती मांग

हेल्थकेयर से स्पेस रिसर्च तक, टीवी से लेकर आईपॉड तक, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग हर क्षेत्र में बेहतर साबित हो रही है। बेसिक सर्किट से लेकर गैजेट्स जैसे कि मोबाइल फोन, पोर्टेबल एमपीथ्री, वीडियो प्लेयर, जीपीएस रिसीवर, वायरलैस सर्विलांस सिस्टम के एडवांस चिपसेट डिजाइन तक इसकी सहायता से बनाए जाते हैं।

क्या है इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में मैनुफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और सर्किट के अप्लीकेशन का अध्ययन किया जाता है। इसमें कई गैजेट और अप्लीकेशन कवर होते हैं। जिसमें टीवी सेट, रेडियो, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, एमपीथ्री प्लेयर से लेकर हेल्थकेयर और स्पेस रिसर्च के इंस्ट्रुमेंटेशन शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर प्रायोगिक समस्याओं के आधार पर हल तलाशन की कोशिश करता है।

वह लगातार ऐसे गैजेट की खोज करता है जो आम व्यक्ति की जिंदगी को आसान और सुखद बना सके। सिर्फ सेलफोन, टीवी जैसे गैजेट में ही इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियिरिंग का करिश्मा देखने को नहीं मिल रहा, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में इसने क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की बदौलत ही दस वर्ष पहले इस्तेमाल होने वाले मोटे, सॉलिड मोबाइल फोन स्लिम आई-फोन में तब्दील हो चुके हैं। साथ ही डिस्प्ले, सेंसेटिव टच स्क्रीन और नेट एक्सेस जैसी तकनीकों में बदलाव आया है।

कैसे पाएं प्रवेश
बारहवीं स्तर पर भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित आपके विषय होने चाहिए। आपको किसी इंजीनियरिंग संस्थान में दाखिला देने के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा देनी होगी। प्रोग्राम उत्तीर्ण करने के बाद आपको बीटेक या बीई की डिग्री मिलेगी। जो बाद में अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, वे एमटेक, एमई या पीएचडी प्रोगाम के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।

हर सेक्टर में उपयोगिता
जहां तक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की बात है, तो हेल्थकेयर से स्पेस रिसर्च तक, टीवी से लेकर आईपॉड तक, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग हर क्षेत्र में अपनी उपयोगिता साबित कर रही है या यूं कहें इलेक्ट्रॉनिक्स हर चीज का हल बन चुकी है। स्पेस रिसर्च में इसका प्रयोग आंकड़ों का विश्लेषण करने में होता है, तो हेल्थ केयर में उपचार के उपकरण भी इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग से संभव है। वहीं डिफेंस और मिलिट्री आधारित कई उपकरण भी इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की ही देन है। भारत जैसे मुल्क में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अवसरों की कोई कमी नहीं है। यहां कई ऐसे डिजाइन हाऊस हैं, जो विदेश में ग्राहकों के लिए उत्पाद या डिजाइन तैयार करते हैं।

भारत में बढ़ रही है मांग
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरों की मांग ज्यादा है। इसका मुख्य कारण भारत में कंप्यूटराइजेशन का बढ़ना है। जैसे इंस्ट्रुूमेंटेशन की जरूरत बढ़ रही है, वैसे ही प्रोसेस इंडस्ट्री में इंजीनियरों की मांग में इजाफा हो रहा है। मीडिया के विस्तारीकरण ने डीटीएच, सेटेलाइट और केबल इंडस्ट्री को बढ़ावा दिया है। हालांकि इंजीनियरिंग कालेजों से मांग के अनुपात में छात्र नहीं आ रहे हैं। ऐसे में  भविष्य कीं सबसे बड़ी चुनौती मिनिएचर सर्किट बनाने की है, जिसकी प्रोडक्शन कीमत कम हो। बेहतर संस्थान से बीटेक और इसके समकक्ष डिग्री उत्तीर्ण करने के बाद आपको 4 से 6 लाख तक की वार्षिक सेलेरी मिल सकती है।

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