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राम की नगरी में राम नहीं मुद्दा

राम की नगरी अयोध्या में ‘राम’ इस लोकसभा चुनाव में मुद्दा नहीं हैं। सपा व कांग्रेस के एजेण्डे में रामनगरी का विकास चुनावी म़ुद्दे के रूप में शामिल है तो सपा ‘राजनीतिक धोखे’ को भुनाने की फिराक में है।ड्ढr बसपा से प्रत्याशी बने अयोध्या राज परिवार के बिमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र का कहना है कि प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने रामनगरी के विकास के लिए 233 करोड़ का पैकेा दिया है। विकास की यह सौगात चुनाव की दिशा तय करगी। बसपा छोड़ सपा की साइकिल पर सवार हुए सपा प्रत्याशी मित्रसेन यादव कहते हैं कि बसपा ने उनका टिकट काटकर राजनीतिक धोखा दिया। फैााबाद के मतदाता इसका बदला लेंगे। कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल खत्री के अनुसार अब मतदाता पर धार्मिक मुद्दे प्रभाव नहीं डालते। उसे विकास चाहिए और स्वच्छ छवि का जनप्रतिनिधि।ड्ढr अयोध्या में हिन्दुत्व के मुद्दे के नीरस होने का ही नतीजा है कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य विनय कटियार ने अयोध्या छोड़ इस बार पड़ोस की अम्बेडकरनगर संसदीय सीट को अपना चुनाव क्षेत्र बना लिया। फैााबाद में भाजपा प्रत्याशी के रूप में प्रदेश उपाध्यक्ष व अयोध्या के विधायक लल्लू सिंह चुनाव मैदान में हैं। लल्लू कहते हैं कि चुनाव में मुद्दा बने न बने लेकिन राम सबके हृदय में वास करते हैं। इन सबके बीच संघ परिवार और विहिप हिन्दुत्व को उभारने की मुहिम में जुटने को तैयार हैं।ड्ढr लोकसभा चुनावों की घोषणा से पहले भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने कई बार राम का राग अलापा लेकिन राम की नगरी अयोध्या इस राग से अब तक तो बेफिक्र है। हाल ही में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व ने यहाँ कई दिनों तक लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हिन्दुत्व के मुद्दे को उफान देने के उद्देश्य व दृष्टि से बैठक कर मंथन किया। देशव्यापी मुहिम की व्यूह रचना भी तैयार हुई। संघ परिवार और विहिप की ही रणनीति के तहत धर्मरक्षा मंच के बैनरतले 14 से 25 मार्च तक पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बिहार के लिए अयोध्या के कारसेवकपुरम् से जनजागरण यात्रा भी निकलेगी। यात्रा को रवाना करने विहिप सुप्रीमो अशोक सिंघल पहुँच रहे हैं। सबसे खास बात यह होगी कि धर्मरक्षा मंच के बहाने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व हनुमानगढ़ी की महंत ज्ञानदास भी संघ और विहिप नेतृत्व के साथ एक मंच पर होंगे। इन सबके बावजूद अभी तक अयोध्या से जुड़ाव रखने वाली फैााबाद संसदीय सीट पर राम और हिन्दुत्व के मुद्दे का कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है। इस बार में रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास कहते हैं कि राम और मन्दिर का निर्माण चुनाव में मुद्दा भले न बने लेकिन यह हाारों हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा प्रश्न तो है ही।

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