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गंगा नदी की भूमि अब लेना नहीं होगा आसान

गंगा नदी के तटबंधों व आस-पास की जमीन पर अतिक्रमण या कब्जा अब मुश्किल होगा। नवगठित राज्य गंगा नदी सरंक्षण प्राधिकरण इस पर पूरी निगरानी रखेगा और उसकी जानकारी राष्ट्रीय प्राधिकरण को देगा। राष्ट्रीय प्राधिकरण की मंजूरी के बाद ही गंगा से लगी जमीन किसी को दिए जाने पर विचार किया जा सकेगा।

केन्द्र सरकार द्वारा  गठित उत्तर प्रदेश राज्य गंगा नदी संरक्षण प्राधिकरण को इस सम्बन्ध में दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्राधिकरण को दिए गए निर्देशों में कहा गया है कि गंगा नदी में प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और उपशमन की निगरानी की जाएगी। राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के निर्देशों के तहत भूमि अजर्न, अतिक्रमण, संविदाएँ और विद्युत आदि से सम्बन्धित मुद्दों का निराकरण  राज्य प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा।

जानकारों का कहना है कि इस प्राधिकरण के गठन से गंगा से लगी जमीन पर प्रस्तावित निर्माण व अन्य परियोजनाओं में  बाधा  आ सकती है। फिलहाल विभाग के अधिकारी केन्द्र सरकार द्वारा भेजे गए इस अधिनियम का अध्ययन कर रहे हैं।

राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई बेसिन प्रबन्धन योजना को राज्य प्राधिकरण लागू कराएगा। जल का दोबारा उपयोग, बारिश के पानी को एकत्र करने और सीवेज के  पानी को साफ करने की परियोजनाओं पर काम करने का अधिकार राज्य प्राधिकरण का होगा।

यह प्राधिकरण  प्रदेश स्तर पर सीवरेज की प्लानिंग, जलागम क्षेत्र के उपचार, बाँध वाले मैदानों की सुरक्षा, लोक जागरूकता पैदा करना और गंगा नदी के जल की गुणवत्ता बनाए रखने के हर संभव कदम उठाएगा। राज्य प्राधिकरण द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर पूरा नियंत्रण केन्द्रीय इकाई रखेगी।

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