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किसान-मित्रों नहीं मिल रहा मानदेय और भत्ता

किसानों को खेती की आधुनिक तकनीक बताने वाले किसान-मित्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। योजना का नवीनीकरण नहीं होने से किसान-मित्रों को आठ माह से मानदेय व भत्ते नहीं मिल रहे हैं। कृषि अधिकारी शासन को बार-बार रिमाइंडर भेज रहे हैं।

शासन ने किसानों को खेती-बाड़ी के नए गुर सिखाने के लिए किसान-मित्र योजना शुरू की थी। इसमें हर ग्राम पंचायत में एक किसान-मित्र की तैनाती की गई। जिले की सभी 405 ग्राम पंचायतों में एक-एक किसान-मित्र तैनात कर दिया गया। इन किसान-मित्रों को 1000 रुपए प्रतिमाह वेतन के साथ 220 रुपए मासिक भत्ते पर नियुक्त किया गया है। एक अप्रैल 2008 से शुरू हुई इस योजना का समय 31 मार्च 2009 को पूरा हो गया, लेकिन वर्ष 2009-10 के लिए किसान-मित्र योजना का नवीनीकरण नहीं हो पाया है। किसान-मित्र आठ माह से रिन्युअल के इंतजार में काम करते जा रहे हैं, मगर उन्हें अपने भविष्य का कोई पता नहीं है। नवीनीकरण के अभाव में उन्हें मानदेय भी नहीं मिल पा रहा है। बिना मानदेय और भत्ते के किसान-मित्र शासन की योजनाओं को किसानों तक पहुंचा रहे हैं। मगर शासन इन किसान-मित्रों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

उप कृषि निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार तोमर ने बताया कि शासन को किसान-मित्र योजना के रिन्युअल को कई पत्र भेजे जा चुके हैं। शासन के आदेश बिना योजना का रिन्युअल नहीं हो पा रहा है। फिर भी किसान-मित्र काम कर रहे हैं। अब फिर से अपर कृषि निदेशक को रिमाइंडर भेजकर किसान-मित्र योजना का रिन्युअल कराने का अनुरोध किया गया है।

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