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स्वास्थ्य विभाग की हेल्पलाइन बीमार, मरीज परेशान

स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रामक रोगों के लिए बनाई गई हेल्प लाइन खुद ही बीमार है। यहां लगाए टेलीफोन उठते ही नहीं है। खास बात तो यह है कि अब तक इस हेल्प लाइन पर जबाव मिलता है कि डेंगू की जांच के लिए शनिवार के बाद ही पता करें। सभी कर्मचारी पोलियो में लगे हैं।

जिला अस्पताल में संक्रामक रोगों की दवा व जांच के लिए एक नियंत्रम कक्ष बनाया गया है। विभाग की ओर से इसके लिए हेल्प लाइन नंबर भी जारी किए हुए हैं, लेकिन हालात यह है कि यह हेल्प लाइन नंबर अधिकतर समय केवल बजते ही रहते हैं। इनको उठाने वाला कोई नहीं होता। फोन पिक होने के बाद भी जो जबाव मिलता है, उससे मरीज अस्पातल में जांच के लिए आने से पहले कई बार सोचेगा। मरीजों को इस कक्ष में आने के बजाय जबाव दिया जाता है कि छह नंबर कक्ष में जाकर खून का जांच करा लें।

सभी कर्मचारी इन दिनों पोलियो डयूटी में लगे हैं, लिहाजा रिपोर्ट कब मिलेगी इसकी बारे में नहीं बता सकते। खास बात यह दो बजे के बाद आने वाले मरीजों को अगले दिन के लिए बोल दिया जाता है। कंट्रोल रूम के लिए विभाग की ओर से कोई समय निर्धारित नहीं किया गया है, लेकिन डेंगू या स्वाइन फ्लू का जांच के नमूने लेने वाला कोई भी कर्मचारी दो बजे के बाद नहीं मिलता। जिला अस्पताल की पैथालॉजी लैब दो बजे बंद हो जाती हैं। ऐसे में मरीज सुबह आठ बजे से दो बजे तक ही जांच के लिए खून दे सकता है।

सोमवार से घर-घर जाकर पोलियो दवा पिलाने का अभियान शुरू हो गया है। इस कार्य में मलेरिया विभाग के करीब 90 कर्मचारियों को लगाया गया है। इसी विभाग के कर्मचारी डेंगू या स्वाइन फ्लू या फिर किसी अन्य संक्रामक रोग की सूचना के बाद नमूने व दवा का छिड़काव करते हैं। पोलियो में डयूटी होने के कारण यह काम भी रुक गया है। नियंत्रण कक्ष से जबाव मिल रहा है कि अब जांच अगले सोमवार को ही की जाएगी। इस सबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एके धवन का कहना है कि मरीजों की जांच में किसी प्रकार की कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। किसी भी प्रकार की शिकायत मिलनं पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कडी कार्रवाई की जाएगी।

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