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नक्सलियों का अभयारण्य बना हरदिया जंगल

मुंगेर तथा जमुई जिले से लगा बांका जिले का सीमावर्ती इलाका माओवादियों के लिए किले का काम करता है। यह इलाका सघन कंटीली झाड़ियों से आच्छादित पर्वतीय श्रृंखलाओं से घिरा है। बिहार ही नहीं बल्कि झारखंड के भी माओवादियों के लिए यह इलाका अभयारण्य बना हुआ है। पुलिस यहां तक नहीं पहुंच पाती है। नतीजतन माओवादी निर्भय होकर यहां से अपनी सांगठनिक और विध्वंसक गतिविधियों को संचालित करते हैं।

इस क्षेत्र में माओवादियों का ही शासन चलता है। पुलिस जब तब ‘ऑपरेशन कांबिंग’ के नाम पर इसके बाहरी इलाके से ही अभियान चलाकर लौट जाती है। इस क्षेत्र में पिछले ढाई दशकों में नक्सलियों के खिलाफ किसी अभियान में पुलिस को एक बार भी सफलता नहीं मिली। दूसरी तरफ माओवादियों ने जब जहां जो चाहा किया। केन्द्र व राज्य सरकार की खुफिया एजेंसियां कई बार अपनी अलग-अलग रिपोर्टो में नक्सलियों द्वारा इस क्षेत्र को रेड कारीडोर बनाये जाने के प्रयासों के बारे में खुलासा कर चुकी हैं।

हाल ही में राज्य सरकार की खुफिया एजेंसी द्वारा पुलिस मुख्यालय को भेजी गयी रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जमुई तथा मुंगेर से लगे बांका जिले के सीमावर्ती जंगलों में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने शरण ले रखी है, जहां से वे इन जिलों में अपनी गतिविधियां भी संचालित कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बगधसवा से आगे पहाड़ की तराई में स्थित हरदिया जंगल में करीब दो से ढाई सौ हथियारबंद नक्सलियों ने अपना स्थायी कैंप बना रखा है। यहां नये रंगरूटों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है। कई बार जंगल के एक सिरे पर स्थित ङील में नहाने आये इन नक्सलियों को आसपास के ग्रामीणों ने भी देखा है।

पास के मटियाकुंड जंगल में भी बड़ी संख्या में नक्सलियों का जमावड़ा है। इससे लगे सिमुलतला क्षेत्र के जंगलों में भी करीब डेढ़ दजर्न प्रशिक्षित माओवादी सक्रिय हैं। नक्सलियों का सबसे बड़ा कैंप लक्ष्मीपुर जंगल में स्थित दाढ़ी पचीसी के आसपास है। ढोलबांध, महेशातरी तथा तरौना में भी बड़ी संख्या में नक्सलियों की उपस्थिति है। इसी क्षेत्र के चट्टीखिरहार, पवना, बसमत्ता, कठसकरा, झाेंपादह, रामडीह, करमा तथा गोड़वा इलाके में भी नक्सलियों ने अपनी समानांतर सत्ता कायम कर रखी है। नक्सली यहीं से अपनी गतिविधियां संचालित करते हैं। माओवादियों ने इस पूरे इलाको को रेड कॉरीडोर बना कर पुलिस प्रशासन को खुली चुनौती दे रखी है। जबकि पुलिस यदा-कदा हाई अलर्ट, रेड अलर्ट जैसे संदेशों का प्रसारण कर फिर शांत हो जाती है।

बांका जिले के सीमावर्ती जंगली क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों की खबर मुङो है। पुलिस ने उनसे निपटने के लिए व्यापक तैयारी कर रखी है। सीमावर्ती इलाके में नियमित कांबिंग आपरेशन चलाए जा रहे हैं। आपरेशन में दो-तीन दिनों तक मैं भी साथ रहा। प्रभावित क्षेत्र के सभी थानों में सैप तथा सीआरपीएफ की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गयी हैं। पुलिस नक्सलियों से निपटने में सक्षम है।

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  • Web Title:नक्सलियों का अभयारण्य बना हरदिया जंगल