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बीमा कंपनी को क्लेम में आनाकानी मंहगी पड़ी

वाहन की मरम्मत पर हुए खर्च को देने से इनकार करना बीमा कंपनी को आनाकानी भारी पड़ गई। एक पीड़ित की शिकायत पर उपभोक्ता फोरम ने बीमा राशि ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है।

इंदिरापुरम निवासी हरीशचंद्र पाठक ने 31 मई 2007 को उपभोक्ता फोरम में न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी दरियागंज, दिल्ली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। जिसमें कहा कि उसने अपने टाटा 407 वाहन का रजिस्ट्रेशन बीमा न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से नौ दिसंबर 2005 से आठ दिसंबर 2006 की अवधि के लिए कराया। इसमें 4,78,800 रुपए का रिस्क कवर लिया गया। 30 जुलाई 2006 को गाय को बचाने के चक्कर में वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। जिस पर 2,16,957 रुपए का खर्च आया। 1,00,000 रुपए मरम्मत करने वाली फर्म को दिया गया। बाकी पैसा न देने पर फर्म ने वाहन नहीं दिया। इधर बीमा कंपनी ने भी क्लेम को निरस्त कर दिया और कोई पैसा नहीं दिया। पीड़ित ने रिस्क कवर की सारी धनराशि देने की गुहार लगाई। उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी की तर्कों को खारिज कर दिया और सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर 1,67,687 रुपए आठ प्रतिशत ब्याज सहित पीड़ित को देने का आदेश दिया। इसके साथ ही 1000 वाद-व्यय भी पीड़ित को देने को दिए जाने का आदेश दिया।

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