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दो वर्षो में शुरू नहीं हुआ एक भी ई किसान

किसानों को सपना तो दिखा दिया गया लेकिन राज्य में एक भी अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ‘ई किसान भवन’ अब तक तैयार नहीं हो सका। हाल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी रिपोर्ट मांगी तो विभाग से भेजे गये पितवेदन में इसकी प्रगित शून्य दिखाई गई। कई जगह तो भवनों का शिलान्याश भी नहीं हो सका है। यह स्थित तब है जब 166 ई किसान भवनों के लिएजिंलों को 68.86 करोड़ रुपये बहुत पहले भेजे चुके हैं। इन भवनों को 2008-09 में ही बनना था। अब तो यह लक्ष्य बढ़कर 332 हो गया है। हालांकि विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उन योजनाओं की प्रगित तेज है, जिंन्हें गत वर्ष तक पूरा हो जाना था।

कई जगह छत की ढ़लाई हो चुकी है। लेकिन काम अबतक पूरा कहीं नहीं हुआ है। विभाग द्वारा अब तक स्वीकृत 166 ‘ई किसान भवन’ में 127 में मिट्टी जांच प्रयोगशाला भी लगाना है। शेष 39 विना मिट्टी जांच प्रयोगशाला के होंगे। सबसे अधिक सात ‘ई किसान भवन’ पटनाजिंला के लिए स्वीकृत किये गये हैंजिंनमें पांच मिट्टी जांच प्रयोगशाला के साथ होंगे।

सरकार की योजनानुसार इन ई किसान भवनों में कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा रहेगी। इससे किसान देश के प्रमुख बाजारों में अपने उत्पादों का भाव भी जान सकेंगे। प्लांट प्रोटेक्शन का केन्द्र भी यहां स्थापित होगा। मौसम की अद्यतन जानकारी किसान यहां से प्राप्त कर सकेंगे। सबसे प्रमुख बात यह है कि इन भवनों में कृषक सलाह केन्द्र भी होंगे। इन केन्द्रों से इलाके के किसान अपनी समस्याओं के निराकरण के उपाय जान सकेंगे। इसके लिए वहां कृषि वैज्ञानिक रखे जायेंगे।

जानकारी के अनुसार इन भवनों में सरकारी स्तर पर दी जाने वाली सुविधाओं के अलावा कुछ सुविधाएं पीपीपी के तहत देने पर भी विचार चल रहा है। अगर सहमित बनी तो इसके लिए निजी कंपिनयों से बात की जायेगी। इन भवनों को इन्टरनेट से तो जोड़ा ही जायेगा, सरकार की मंशा है कि इसमें कृषि उपकरणों के बैंक भी बनाये जायें। इससे छोटे किसानों को भी अत्याधुनिक तरीके से खेती करने में मदद मिलेगी।

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