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पुणे सरक गई जापान की कंपनी, पलायन जारी

उद्योगों के प्रति सरकार की कथित उपेक्षा नीति के चलते ऑटो पार्ट्स बनाने वाली एक बहुराष्ट्रीय कंपनी यहां से पलायन कर गई है। एनआईटी के औद्योगिक क्षेत्र से जापान की डेंसो प्राइवेट लिमिटेड यहां से डेरा-डंडा उठाकर पुणें (महाराष्ट्र) चली गई। यहां से मशीनें पुणे शिफ्ट कर दी हैं।

कंपनी यहां एनआइटी के प्लॉट नंबर 45-46 में चल रही थी। करीब सात साल पहले इटली की एक कंपनी ने यहां अपना प्लांट लगाया था। एक साल बाद ही उसे जापान की डेंसो ने टेकऑवर कर लिया। यह कंपनी बीते दो साल से अपने यूनिट यहां से पूणे शिफ्ट करने को प्रयासरत थी। इसके चलते कंपनी से श्रमिकों को निकालने एवं ट्रांसफर का काम चल रहा था। यहां के अधिकांश श्रमिक ठेकेदारी पर थे। इस वजह से प्लांट शिफ्ट करने में कंपनी को खास समस्या नहीं आई। फिर भी डेंसो ने एक सार्वजनिक सूचना के माध्यम से शिटिफटिंग के मामले में हर तरह के विवाद कंपनी लॉ बोर्ड में सुलझाने को आवेदन मांगा है।

श्रमिक नेता बेचूगिरी ने बताया कि अधिकतर कंपनियां श्रमिकों को ठेके पर रखती हैं। वहां कोई यूनियन आदि भी नहीं होती। ऐसे में ये कभी भी बंद कर रफूचक्कर हो जाती हैं। डेंसो के ठेके के श्रमिकों के कंपनी में आने पर ठेकेदार ने दिवाली से पहले ही रोक लगा दी थी। कुछ इंजीनियरों का पुणे तबादला कर दिया गया है। ठेके के मजदूर निकाल दिए गए हैं।

श्रम-उपायुक्त डीएन कौशिक ने जानकारी दी कि मेरी जानकारी में नहीं है कि ऐसी कोई कंपनी बंद हुई या शिफ्ट हुई। श्रमिक उनके पास कोई समस्या लेकर नहीं आए।

ऑटो पार्ट्स बनाने वाली डेंसो की तरह यहां से अन्य औद्योगिक इकाईयों का पलायन जारी है। पिछले पांच सालों में यहां से कई छोटी-बड़ी कंपनियां पलायन कर चुकी हैं। उद्यमियों को हिमाचल और उत्तराखंड में अधिक सुविधाएं मुहैया कराए जाने के चलते वे उधर का ही रुख कर रहे हैं। उत्तराखंड और हिमाचल में केंद्र सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क व आयकर में छूट दे रखी है। इन राज्यों की सरकारें अगले दस साल तक केंद्रीय उत्पाद शुल्क नहीं वसूलतीं तथा आयकर में भी छूट देंती हैं। इसके मद्देनजर कंपनियों ने इन राज्यों में अपनी इकाइयां हस्तानांतरित कर रही हैं। फरीदाबाद की ड्रग्स इंडस्ट्रीज इन राज्यों में पलायन कर गई हैं। कुछ उद्योगों ने अपनी कंपनियों को विस्तार करने के उद्देश्य भी यहां से अपनी यूनिट समेट ली है।

मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के महासचिव रमणीक प्रभाकर कहते हैं कि उत्तराखंड व हिमाचल में उद्योग लगाने पर टैक्सों में करीब 49 फीसदी की बचत होती है। फरीदाबाद में उद्योगों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं। यहां का बुनियादी ढांचा भी चरमराया हुआ है। इसलिए औद्योगिक इकाईयां यहां से पलायन कर रही हैं।

 

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