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फलस्तीन था यासिर का पहला प्यार, सुहा दूसरा

फलस्तीन था यासिर का पहला प्यार, सुहा दूसरा

दिवंगत फलस्तीनी नेता यासिर अराफात की पत्नी सुहा ने कहा कि मातृभूमि के बाद वह अपने दिवंगत पति का दूसरा सबसे बड़ा प्यार थी।

अराफात फलस्तीन की आजादी के प्रति कृतसंकल्प थे, इस बात पर जोर देते हुए सुहा ने कहा, उनका दूसरा प्यार होना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।

सुहा ने कहा, मेरा जब विवाह हुआ तो मुझे पता चला कि मेरे लिए भी रास्ते खुले हैं। मुझे पता था कि हमेशा उनका पहला प्यार फलस्तीन तथा राजधानी यरुशलम रहा।

सुहा ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि जब उनके पति कोमा में थे तथा पेरिस के एक अस्पताल में जीवन और मृत्यु से जूझ रहे थे तो उन्होंने अराफात को उठने और शत्रु इस्राइल के प्रधानमंत्री एरियल शेरान को परास्त करने को कहा था।

फलस्तीनी नेता की पांचवीं पुण्यतिथि से पहले सउदी महिलाओं के एक साप्ताहिक से सुहा ने कहा, जब 15 दिन के लिए उनकी चेतना चली गयी तो चिकित्सकों ने कहा था कि उन्हें उन चीजों के बारे में बताया जाए जिसे वह पंसद या नफरत करते थे।

साप्ताहिक में सुहा के बयान के हवाले से दैनिक हारेत्ज ने लिखा है, इसलिए गहन चिकित्सा कक्ष में मैं उनके साथ थी, मैं उनके लिए कुरान की आयतें पढ़ती थी और उनके लिए दुआ करती थी।

फलस्तीनी नेता के छद्म नाम के संबंध में सुहा ने कहा, मैं उन्हें कहती थी उठो अबु अमर, क्या आप अपनी बेटी जाहवा की मुस्कुराहट को नहीं देखना चाहते। आप उठ जाओ ताकि आप अपने शत्रु (एरियल) शेरान को परास्त कर सको।

सुहा की यासिर के साथ पहली मुलाकात के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, क्रांतिकारी होने के कारण शुरुआत में मैं यासिर की ओर आकर्षित हुई बाद में मैं उनके साहस तथा बुद्धिमता पर फिदा हो गयी। सुहा ने कहा, मुझे आशा है कि उन्हें जन्नत नसीब हुई होगी।

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