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मेरा टॉमी, मेरा दोस्त

मेरा टॉमी, मेरा दोस्त

‘जब कोई बात बिगड़ जाए, तुम देना साथ मेरा..’ गाने की ये पंक्तियां अपने पार्टनर के लिए जितनी सटीक बैठती हैं, उतनी ही सटीक डॉगी के लिए भी बैठती हैं। वाकई अपने पालतू कुत्ते के साथ भी लगाव इतना गहरा होता है कि उससे दूरी सहन नहीं होती, उसका दुख सहन नहीं होता, क्योंकि वह किसी बेस्ट फ्रेंड या पार्टनर से कम नहीं होता। अब तो कुत्ते की किसी खास प्रजाति को पालतू बनाकर रखना स्टेटस सिंबल का भी प्रतीक बन गया है।

कैसे-कैसे कुत्ते
पूरी दुनिया में पालतू कुत्तों की करीब 300 प्रजतियां पाई जती हैं। कुछ कुत्ते शिकार (अफगान्स, बीजल्स आदि) करने में माहिर होते हैं, तो कुछ स्पोर्ट्स और गेम्स (लैब्राडोर, कॉकर स्पेनियल, आइरिश सेटर आदि) के हिसाब से बेहतर होते हैं। कुछ कुत्ते (केरी ब्लू, पग, पॉमेरेनियन आदि) बेहद छोटे आकार के होते हैं, तो कुछ कुत्ते (बॉक्सर, डोबरमैन, रॉटवेलर आदि) ऐसे होते हैं, जिनका इस्तेमाल विभिन्न कार्यो के लिए किया जाता है।

चयन में सावधानी जरूरी
यदि आप पेट्स रखने की योजना बना चुके हैं तो इस मामले में सबसे पहले अपनी जरूरतों का ध्यान रखें। सुरक्षा, शिकार, शो, गेम आदि किस उद्देश्य से आपको की जरूरत है, इस पर पहले ही सोच-विचार कर लें। कुत्तेके आकार का भी ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि कुछ कुत्तेकाफी बड़े आकार के होते हैं, जबकि कुछ बेहद छोटे। कुत्ता स्वस्थ हो, इस बात की भी जांच-पड़ताल कर लें। ‘पपी जब 3 महीने का हो जाए तो उसकी खरीदारी ठीक रहती है।’ कहते हैं पेट क्लि.निक, दिल्ली के डॉ. विकास शर्मा।

आहार और साफ-सफाई
कुत्तों का विकास अच्छी तरह हो, इसके लिए उनके खान-पान पर ध्यान देना जरूरी है। ‘एक साल से अधिक उम्र के कुत्तों को जहां दिन में दो बार खाना देना पड़ता है, वहीं 6 महीने से कम उम्र के पपी को 4 बार और 6 से 12 महीने के छोटे कुत्तों को तीन बार भोजन देना पड़ता है।  खान-पान में वेज और नॉन-वेज दोनों ही तरह के भोजन का समावेश होना चाहिए। हालांकि बाजर में रेडीमेड आहार मिलते हैं, पर होममेड फूड ही अधिक अच्छा है।’ कहते हैं गुड़गांव स्थित केनेल1 के इंचाजर्-कम-पार्टनर डी.के. घोष।

ट्रेनिंग और एक्सरसाइज
कुत्तों के लिए जितनी जरूरी आवश्यक ट्रेनिंग है, उतनी ही जरूरी एक्सरसाइज भी है। कुत्तों के व्यायाम में टहलना, दौड़ना, बॉल से खेलना आदि शामिल हैं। सामान्य एक्सरसाइज के अलावा कुत्तों के लिए ट्रेनिंग बेहद जरूरी है, ताकि वे अपने गुस्से पर नियंत्रण रख सकें तथा टॉयलेट संबंधी जरूरतों को अभिव्यक्त कर सकें। पेट शॉप एंड क्लिनिक, नोएडा के कौशिक साहा बताते हैं, ‘ट्रेनर की मदद ली ज सकती है, जो 2-3 हजार रुपये लेकर तीन-चार महीने में पपी को ट्रेनिंग देता है, पर अच्छा है खुद ही उसे ट्रेंड करना।’ नि:संदेह ट्रेनिंग के बाद ही कुत्तेऔर उसके मालिक का रिश्ता और भावनात्मक हो जाता है।

स्वास्थ्य का ध्यान
तमाम सावधानियों के बावजूद कुत्तों को कई बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में आवश्यक टीका (वैक्िसन) लगाया जना बेहद जरूरी है। कई तरह के रोग इन पालतुओं को हो सकते हैं, जसे रैबीज, कोल्ड, इंफ्लूएंज, टिक्स, हीट वॉर्म आदि। इसके अलावा वे तनाव और डिप्रेशन के भी शिकार होकर सुस्त नजर आने लगते हैं। ऐसे में फौरन किसी पेट क्लिनिक से संपर्क करें।

तो क्या आप नहीं चाहेंगे अपनी पसंद के किसी डॉगी को अपने साथ रखना। हां, उसके लिए कोई खूबसूरत नाम भी जरूर सोच लीजिएगा, ताकि नाम पुकारते ही वह फौरन आपके पास दौड़ता आ जए। टॉमी, मोती, बूट्स, आबरा, हीरो, जबांज, मिस्टर बार्क, एलेक, एलिया आदि किसी भी नाम से आप उसको बुला सकते हैं।

पपी की कुछ किस्में और उनके दाम
जर्मन शेफर्ड - 8 हजार
रॉटवेलर - 15 हजार
डालमेशन - 6 हजार
पग - 15 हजार
बॉक्सर - 10 हजार
लैब्राडोर - 8 हजार
कॉकर स्पेनियल - 8 हजार
गोल्डन रिट्रिएवर - 12 हजार
फ्रेंच मस्टिफ- 30 हजार
पॉमेरेनियन-3 हजार

अब पेट्स के लिए हवाई यात्रा भी
अभी तक पेट्स को हवाई यात्रा का सुख नहीं मिल पाता था, लेकिन अब पेट्स लवर्स के लिए एक खुशखबरी है। एक अमेरिकी एयरवेज कंपनी ने पालतू जनवरों के लिए भी एयर ट्रैवल के द्वार खोल दिए हैं। यह अलग बात है कि उनके लिए उसमें कोई सीट नहीं बनाई जएगी, बल्कि खास तौर पर उनके लिए बनाए गए घर (केनेल) में ही वे हवाई यात्रा का लुत्फ उठाएंगे। इस दौरान बीच-बीच में उनके खान-पान और बाथरूम संबंधी जरूरतों का भी खास ध्यान रखा जाएगा। हालांकि भारत में अभी ऐसी कोई सेवा नहीं है, पर यहां भी पेट्स लवर्स चाहते हैं कि उनके प्यारे पेट्स के लिए ऐसा कुछ शुरू किया जाए।

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