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'गुरु-चेले' की असफलता भी बनी हार का कारण

'गुरु-चेले' की असफलता भी बनी हार का कारण

सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग की मशहूर सलामी जोड़ी ने वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 3000 से अधिक रन जोड़े हैं लेकिन आस्ट्रेलिया के खिलाफ ये दोनों अच्छी शुरुआत देने में नाकाम रहे जो भारत की हार का प्रमुख कारण रहा।

तेंदुलकर और सहवाग ने इसी सीरीज के दौरान सलामी जोड़ी के रूप में तीन हजार रन पूरे किये। इन दोनों ने अब तक मिलकर 75 मैच में पारी का आगाज किया जिसमें उन्होंने 42.09 की औसत से 3,157 रन जोड़े जिसमें दस शतकीय और 14 अर्धशतकीय साझेदारियां भी शामिल हैं।

लेकिन आस्ट्रेलिया के खिलाफ शुरुआती छह मैच में इन दोनों की जोड़ी दस ओवर तक भी नहीं टिक पायी। इन मैचों में इन दोनों के बीच साझेदारी का औसत 32.66 रहा जिसमें हैदराबाद में निभायी गयी 66 रन की साझेदारी भी शामिल है लेकिन तब भी सहवाग नौवें ओवर में पवेलियन लौट गये थे। आस्ट्रेलिया ने इसका पूरा फायदा उठाया और उसने अब सात मैचों की सीरीज में 4.2 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है।

पिछले छह मैच में से पांच मैच में सहवाग के आउट होने से इन दोनों की साझेदारी टूटी। पहले दो मैच और गुवाहाटी में छठे मैच में तो इनके बीच की साझेदारी पांच ओवर तक भी नहीं खिंच पायी जबकि बीच के तीन मैच में सचिन और सहवाग की यह जोड़ी ने 37, 40 और 66 रन की साझेदारियां की।

इससे पहले द्रविड़ को दो साल पहले टीम से बाहर किया गया था। उसके बाद उनकी वापसी तक भारत ने जो 47 मैच खेले उनमें आठ बल्लेबाजों को तीसरे नंबर पर अजमाया गया।


इनमें गंभीर सबसे सफल रहे जिन्होंने द्रविड़ की गैरमौजूदगी में सर्वाधिक 16 पारियों में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी की। इसमें उन्होंने 44.35 की औसत से 621 रन बनाये जिसमें श्रीलंका के खिलाफ ब्रिस्बेन में नाबाद 102 रन और आस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में 113 रन की पारी भी शामिल है।

युवराज सिंह भी आस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे नंबर पर अपेक्षानुरूप बल्लेबाजी करने में असफल रहे हैं। उन्होंने वर्तमान सीरीज में जो पांच मैच खेले उसमें केवल 128 रन ही बना पाये जिसमें उनका सर्वाधिक स्कोर 78 रन रहा। यदि इस पारी को निकाल दिया जाता है तो बाकी चार मैच में उनके नाम पर केवल 50 रन दर्ज होंगे।

कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने पहले तीन मैच में पांचवें नंबर पर अपनी भूमिका से पूरा न्याय किया और वह मध्यक्रम की रीढ़ बनकर उभरे लेकिन पिछले तीन मैच में वह केवल 56 रन बना पाये और उनकी असफलता भी टीम की हार का कारण बनी। सुरेश रैना छठे नंबर पर केवल दो पारियों को छोड़कर बाकी मैच में नहीं चल पाये जबकि कोहली ने जो दो मैच खेले उनमें 30 और दस रन बनाये।

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