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अफगानिस्तान भारतीय खुफिया एजेंसी के प्रभाव में: मुशर्रफ

अफगानिस्तान भारतीय खुफिया एजेंसी के प्रभाव में: मुशर्रफ

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने प्रत्येक आतंकवादी संगठन में आईएसआई की घुसपैठ को स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही आरोप लगाया है कि अफगानिस्तान भारतीय खुफिया एजेंसियों के प्रभाव में है और उनके पास इस संबंध में दस्तावेजी सबूत है।

मुशर्रफ ने सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा  अफगानिस्तान खुफिया, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति, अफगानिस्तान की सरकार इनके बारे में बात मत करें। मैं जानता हूं कि वह क्या कर रहे हैं। वह सुनियोजित तरीके से दुनिया को गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान के खिलाफ बोल रहे हैं, क्योंकि वे भारतीय खुफिया एजेंसियों के प्रभाव में हैं, सभी उनके प्रभाव में हैं। मुशर्रफ से जब तालिबान नेता मुल्ला उमर के पाकिस्तानी शहर क्वेटा में मौजूद होने की खबर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान का खुफिया तंत्र पूरी तरह से भारतीय खुफिया एजेंसी के प्रभाव में है। हम इस बात को जानते हैं।

उन्होंने कहा कि जो बात मैं कहा रहा हूं, ऐसा मैंने पहली बार नहीं कहा है। मैंने इस संबंध में सभी को दस्तावेजी सबूत दिये हैं। इस बात के दस्तावेजी सबूत हैं। अभी लंदन में रह रहे मुशर्रफ ने आरोप लगाया कि इस बात के दस्तावेजी सबूत हैं। और हम उनके अफगानिस्तानी खुफिया साथ भारतीय खुफिया एजेंसियों की सहभागिता के बारे में जानते हैं।

पूर्व पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कहा कि मैंने ऊपर से नीचे तक सभी लोगों को इस विषय पर दस्तावेजी सबूत दिये हैं। सभी इस बात को जानते हैं। इस बारे में हमारे पास दस्तावेजी सबूत हैं। मुशर्रफ ने उन रिपोर्टरों और अमेरिकी नेताओं के उन बयानों से इनकार किया कि आईएसआई के अभी भी आतंकवादियों के साथ संपर्क हैं।

उन्होंने कहा कि आईएसआई आतंकवादियों का सहयोग नहीं करेगी। यह सरकार की नीति नहीं है। यह सैन्य नीति भी नहीं है। हालांकि उनकी पहुंच है। मुशर्रफ ने कहा कि हमेशा, सभी संगठनों तक आईएसआई की पहुंच रही है। और यह दक्षता और आईएसआई के प्रभाव से जुड़ी हुई है। आपकी वहां तक पहुंच होनी चाहिए ताकि आप इन संगठनों को प्रभावित कर सके। इसका अर्थ यह नहीं की आप इन संगठनों का समर्थन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनके कुछ सम्पर्क हैं, जिसका उपयोग वे अपने लाभ के लिए करते हैं। मुशर्रफ ने कहा कि विदेशी सैनिकों का अफगानिस्तान में स्वागत नहीं किया जा रहा है, लेकिन चूंकि वह वहां हैं तो उन्हें अल कायदा और तालिबान के खिलाफ युद्ध में जीत दर्ज करनी चाहिए। और पीछे हटना तो विकल्प हो ही नहीं सकता है।

उन्होंने कहा कि जो लोग भी वहां से पीछे हटने की बात कर रहे हैं, वह इसके परिणाम को नहीं समझ रहे हैं। उन्हें बैठकर इसका विश्लेषण करना चाहिए कि बिना समस्या का समाधान निकाले पीछे हटने के बाद क्या होगा। उन्होंने कहा कि हमें अलकायदा को परास्त करना है, हमें तालिबान पर बढ़त हासिल करनी है और हमें अफगानिस्तान में विश्वसनीय, वैध सरकार को पेश करना है। लेकिन हम उससे पहले नहीं हट सकते हैं।

पूर्व सैन्य शासक ने पाकिस्तान में मुल्ला उमर के मौजूद होने और क्वेटा शूरा को चलाने की खबरों से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह खबर दो लाख प्रतिशत गलत है। मुशर्रफ ने कहा कि मुल्ला उमर वहां नहीं है। मैं इस बात में शत प्रतिशत सही हूं। वह वहां नहीं हो सकता है, क्योंकि पागल होगा, अगर वहां होगा। क्योंकि उनका नियंत्रण अफगानिस्तान का दक्षिण पूर्वी इलाका है।

उन्होंने कहा कि अब अगर मैं तालिबान नेता होउंगा और मेरा किसी क्षेत्र पर नियंत्रण होगा, तो मैं किसी अन्य स्थान पर जाकर अपने आप को क्यों खतरे में डालूंगा जहां सेना और फ्रंटियर कार्प्स एवं अमेरिकी खुफिया मौजूद हों।

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