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जल से जमीन की तलाश

अक्टूबर के पहले सप्ताह में औरंगाबाद(बिहार)में कुछ अजीबों-गरीब राजनीतिक गहमा-गहमी थी। सीधे तौर पर मुद्दा सिंचाई के लिए उत्तरी कोयल नहर प्रणाली से पानी वितरण में दो विधायकों के हस्तक्षेप व सीधे तौर पर भिड़ंत से जुड़ा था,किन्तु इसके राजनीतिक निहितार्थ कुछ और थे।

औरंगाबाद के विभिन्न मीडिया संगठनों के संवादसूत्र न तो समस्या की जड़ में जाने में और ना ही दो दबंग विधायकों-रामाधार सिंह और डब्ल्यू सिंह के राजनीतिक दांव-पेंच को जानने में ही रूचि ले रहे थे, बल्कि टीवी चैनल के पत्रकारों के लिए डब्ल्यू सिंह की गिरफ्तारी की ब्रेकिंग न्यूज देना और प्रिंट वालों के लिए उनके बयान व जुबानी को पूरी तरह शब्दबद्ध करने की होड़ ही,सबसे बड़ी खबर थी।

बेहतर तो यह होता कि पहले दो विधायकों के स्टंट के राजनीतिक निहितार्थ पर चर्चा की जाती क्योंकि हिन्दी प्रदेशों की प्रबुद्ध जनता सबसे पहले राजनीतिक खबरों की तड़का का स्वाद पूरी चटकारे के साथ लेना पसंद करती हैं। रामाधार सिंह भाजपा के विधायक तथा वर्तमान में सत्तारूढ़ दल के उपसचेतक हैं। तथाकथित तौर पर कुल मिलाकर वे पूरे औरंगाबाद जिला क्षेत्र के सबसे प्रभावी और तेज-तर्रार नेता हैं। साथ ही. उन्हें सत्तारूढ़ दल के प्रभाव समेटने का भी मौका हासिल है।

जिले के दो अन्य विधायक-निहालुद्दीन(रफीगंज)और सत्यानारायण यादव(ओबरा) राजद का दुर्गति तथा विपक्ष की स्थिति के कारण जिले की राजनीति में कोई बिसात नहीं रखते हैं। गोह के विधायक डॉ रणविजय कुमार आपराधिक मामले में पिछले तीन साल से जेल में हैं,जबकि देव(सुरक्षित) क्षेत्र के की विधायिका रेणु देवी सत्ता रूढ़ दल की होने के बावजूद भी मूलतः दो वजहों से स्वयं को जिले की राजनीति से दूर रखती हैं। पहली वजह,वहां के वर्तमान सांसद सुशील सिंह के साथ राजनीतिक और व्यक्तिगत विरोध तथा दूसरी वजह, परिसीमन के बाद उभरे कुटूम्बा(सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र में जातिगत
समीकरण के हिसाब खुद को सुरक्षित समझना। अब बचे नबीनगर के विधायक डब्ल्यू सिंह,जो लोक जन शक्ति पार्टी के विधायक हैं और धन-बल के मामले में जिले में ऊंची बिसात रखते हैं। पुलिस ट्रेनिंग कैंप में उनके द्वारा गैर-कानूनी रूप से फायरिंग करना आदि करतूतें उनकी दबंगता को दबिश देती है।

उत्तरी कोयल-कारो परियोजना के तहत के नहर से सिंचाई जल के बंटवारे में हस्तक्षेप के माध्यम से रामाधार सिंह और डब्ल्यू सिंह ने जल की आड़ में खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने की मुहिम छेड़ा था। बहुत हद तक दोनों इसमें सफल भी हुए। रामाधार सिंह पर आरोप है कि वे पिछले चार वर्षों में जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पायें हैं और ना ही सुशासन की पूरी मुहिम को जिले में न तो गति दे पायें हैं और ना ही दिशा। आरोप तो यहां तक है कि जिले की सारी योजनाओं एवं प्रशासनिक पहल में उनका सीधा हस्तक्षेप है। लेकिन यह हस्तक्षेप जनता की नजर में सकारात्मक की
जगह नकारात्मक रूख अख्तियार कर चुका है।

इस तरह वे जनता से काफी दूर हो चुके हैं। जब जिले में कार्यान्वित सारी योजनाओं में कमीशन की स्थापित हो रही परंपरा पर अनौपाचारिक चर्चा छेड़ी तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से कहा कि देखिए! विधायक का सारा फर्ज पूरी ईमानदारी से निभाने पर पोलिंग एजेंट बनना भी मुश्किल हो जाएगा।

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