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फिटमेंट कमेटी की कई अनुशंसाएं लागू नहीं

फिटमेंट कमेटी की कई महत्वपूर्ण अनुशंसाओं को राज्य सरकार ने लागू नहीं किया। राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों को केंद्रीय पैटर्न पर नया वेतनमान देने की अधिसूचना जारी कर दी है। फिटमेंट कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर राज्यकर्मियों को जनवरी 2006 से छठे केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित वेतनमान दिया गया है। शीर्षस्थ अधिकारियों का कहना है कि कमेटी की सभी अनुशंसाएं मानना सरकार के लिए संभव नहीं है। उसे मान लेने से सरकार की माली हालत बदतर हो जायेगी।ड्ढr राज्य राजपत्रित पदाधिकारी महासंघ समेत कई अधिकारी-कर्मचारी संगठनों ने नये वेतनमान के कई बिंदुओं का विरोध किया है। वैसे सरकारी कार्यालयों में नये वेतनमान को लेकर गहमा-गहमी तेज हो गयी है। फिटमेंट कमेटी ने जनजातीय क्षेत्र में तैनात सभी कर्मियों को क्षेत्रीय भत्ता और केंद्र के अनुरूप चिकित्सा सुविधा देने की अनुशंसा राज्य सरकार से की है। इसे सरकार ने नहीं माना। फिटमेंट कमेटी ने ऐसी एक दर्जन अनुशंसाएं की थीं।जिन पर नहीं हुआ अमलके अनुरूप चिकित्सा सुविधाड्ढr स्वीकृत पद के विरूद्ध कांट्रैक्ट पर कार्यरत कर्मियों को पे बैंड एवं गड्र वेतनड्ढr मैट्रिक पास ग्रुप डी के कर्मियों को ग्रुप सी का वेतनड्ढr पुलिस, एक्साइज, फॉरस्ट गार्ड का वेतनमान एक समानड्ढr राज्य के शिक्षकों को केंद्रीय वेतनमान देने के साथ केंद्रीय सेवा शर्तड्ढr लंबे समय से खाली पदों की समाप्तिड्ढr सभी संवर्गो के लिए तुरंत सेवा शर्त निर्धारित हो तीन साल से लटका हैड्ढr आइएएस में प्रोमोशन का मामलारांची। राज्य प्रशासनिक सेवा से आइएएस में प्रोमोशन का मामला एक बार फिर लटक गया है। वर्ष 2006 से प्रोमोशन लंबित है। राप्रसे के 16 अधिकारियों को आइएएस में प्रोमोशन मिलना है। केंद्र एवं यूपीएससी को इस संबंध में अबतक प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। पहले से ही राज्य में आइएएस अफसरों की संख्या कम है।ड्ढr राज्य में सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों के लिए फिलहाल वरीयता निर्धारण का सिद्धांत नहीं है। वरीयता सूची को अंतिम रूप देने और नाम भेजने को लेकर अधिकारियों में दांव-पेच चल रहा है। एक तबका आरक्षित कोटे के लोगों की वरीयता प्रोन्नति की तिथि से कराने के पक्ष में हैं। दूसरा तबका मूल कोटि और सूची की स्थिति को बरकरार रखते हुए वरीयता निर्धारण चाह रहा है।ड्ढr नया सिद्धांत लागू करने का संकल्प जारी नहीं हो रहा है। सरकार ने वरीयता निर्धारण सिद्धांत तैयार करने के लिए तत्कालीन कार्मिक सचिव आरएस शर्मा की अध्यक्षता में जेबी तुबिद, पीके जाजोरिया एवं विधि सचिव प्रशांत कुमार की समिति बनायी थी। समिति ने संकल्प की रूपरखा तय की। मामले को कैबिनेट में रखना था, लेकिन एक सचिव ने इसे चार माह तक लटकाये रखा। ं

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