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अदालत ने लगाई पुलिस को फटकार

जनता के जानमाल की हिफाजत करने वाली पुलिस ही अगर किसी की संपत्ति पर बिना किराया दिए जबरन काबिज हो जाए तो यह चोरी और सीनाजोरी कही जाएगी। लेकिन मामले को अदालत में ले जाने पर अगर पुलिस बार बार अपनी बात से पलटे तो इसे क्या कहा जाए?


दिल्ली हाईकोर्ट ने एक निजी संपत्ति पर बिना किराया दिए जबरन काबिज होने संबन्धी 16 साल पुराने एक मामले में पुलिस को बार बार अपनी बात से पलटने पर कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने अदालत द्वारा निर्धारित किए गए किराए का भी भुगतान न करने पर दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को स्वयं इस मामले को देखने का निर्देश दिया। जस्टिस कौल ने कहा कि पुलिस के बार बार अपनी बात से मुकरने के कारण ही यह याचिका 16 साल से लंबित पड़ी है।

अदालत ने जामा मस्जिद के पास स्थित इस संपत्ति पर पुलिस के कब्जे को हटाने के लिए पुलिस कमिश्नर को भी उचित क ार्रवाई करने का आदेश दिया। अदालत द्वारा गठित एक कमेटी ने पुलिस की सहमति से किराए की राशि 34800 रुपए तय की थी। इसे भी पुलिस ने देने से मना कर दिया। अदालत ने पुलिस की भूमि और शाखा के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के रवैये को भी आपत्तिजनक बताया जिनकी सहमति से तय की गई राशि की अदायगी से पुलिस ने इंकार कर दिया।

फातिमा बी और अन्य ने याचिका में शिकायत की है कि विवादित इमारत की दो मंजिलों को पुलिस ने 1950 से ही किराए पर ले रखा है और तभी से चले आ रहे 50 रुपए के किराए को भी कई सालों से देना बंद कर दिया है।

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