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नहीं रहे साहित्यकार केपी सिंह, किया देहदान

हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार प्रोफेसर केपी सिंह नहीं रहे। उन्होंने रविवार को अपराह्न चार बजे अवंतिका कॉलोनी स्थित अपने निवास पर अंतिम साँस ली। उनका पार्थिव शरीर जेएन मेडिकल कॉलेज की टीम को सौंप दिया गया। देहदान ही उनकी अंतिम इच्छा थी। वे जब तक रहे हिन्दी की सेवा की और अपनी मृत्यु के बाद चिकित्सा जगत की सेवा की।

रविवार की दोपहर करीब सवा तीन बजे श्री सिंह को गले में परेशानी महसूस हुई। परिजन उन्हें नोएडा के फोर्टिस अस्पताल ले जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि उन्होंने अंतिम साँस ले ली। वे न्यूरो डायबिटिक थे। वर्षो तक हिन्दी की सेवा करने वाले श्री सिंह की अंतिम इच्छा देहदान करने की थी, जो उन्होंने 25 अक्टूबर को हबीब गार्डन्स में एक समारोह के दौरान व्यक्त की थी।

उन्होंने कहा था कि देहदान को ही उनका अंतिम संस्कार माना जाए। इस घोषणा के 14 दिन बाद ही 73 वर्षीय केपी सिंह ने दुनिया से नाता तोड़ लिया। कार्यक्रम में उस समय उनका अभिनंदन हो रहा था।

इसी दौरान प्रदीप सक्सेना की उनके ऊपर लिखी पुस्तक ‘कल हमारा है’ का विमोचन भी किया गया था। रविवार रात आठ बजे जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की टीम उनके अवंतिका कॉलोनी स्थित आवास से उनका पार्थिव शरीर ले गई। वहाँ शव का लेपन कर उसे रखा जाएगा।

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