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सत्ता की चुनावी राजनीति में अपने हुए पराए

ठीक विधानसभा चुनाव के पूर्व मुलायम सिंह के करीबी माने जाने वाले सपा के प्रदेश अध्यक्ष व पश्चिम सिंहभूमि के सपा उम्मीदवार बन्ना गुप्ता का रातोंरात सपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होकर प सिंहभूम से कांग्रेस का अधिकृत उम्मीदवार घोषित किए जाने से सपा नेतृत्व खासकर मुलायम सिंह को भारी झटका लगा है।

मुलायम सिंह ने महज दो महीने पूर्व पुराने पार्टी कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के बावजूद बन्ना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर सौंपी थी। उन्होंने यह परिवर्तन विधानसभा चुनाव को देखते हुए किया था। मुलायम सिंह को उम्मीद थी कि बन्ना गुप्ता जैसे युवा के हाथों प्रदेश का नेतृत्व सौंपने से पार्टी की स्थिति मजबूत होगी। ज्ञात हो कि गुप्ता पहले भी सपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके थे, लेकिन उन्होंने सपा छोड़कर बाबूलाल मरांडी के झाविमो का दामन थाम लिया था।

दल-बदलु माने जानेवाले गुप्ता प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी संभालते ही पार्टी में झारखंड के संस्थापक पूर्व प्रदेश सचिव आजम अहमद को पार्टी से निकाल दिया था। आजम अहमद को निकाले जाने के विरोध में दलबदलू मानेजानेवाले बन्ना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के विरोध पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष छत्तर सिंह समेत प्रदेश पार्टी के विभिन्न मोर्चों के सात अध्यक्षों सहित 14 जिलाध्यक्षों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस्तीफा दिया था। मुलायम सिंह बन्ना गुप्ता की कीमत पर पार्टी के दो दर्जन पुराने व समर्पित कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़ने को भी बर्दाश्त कर गए।

सिंह को उम्मीद थी कि बन्ना गुप्ता चुनाव में पार्टी की नैय्या बखूबी पार लगाएंगे, लेकिन हुआ ठीक इसके विपरीत। सपा को चुनावी समर में न माया मिली न राम। पुराने कार्यकर्ता भी जदयू में शामिल हो कर सपा विरोधी हो गए।

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