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यूपी में गंगा नदी संरक्षण प्राधिकरण बना

केन्द्र सरकार ने यूपी के लिए राज्य गंगा नदी सरंक्षण प्राधिकरण का गठन कर दिया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। प्राधिकरण का अध्यक्ष मुख्यमंत्री को बनाया गया है। उनके अलावा 17 सदस्य होंगे। इसका मुख्यालय लखनऊ में होगा। राज्य सरकार ने प्राधिकरण के लिए गैर सरकारी पाँच सदस्यों के नाम अभी तक केन्द्र सरकार को नहीं भेजे हैं। 

केन्द्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि पर्यावरण, वन, वित्त, शहरी विकास, सिंचाई, लोक निर्माण, आवास विभाग के मंत्री, कानपुर, वाराणसी और इलाहाबाद के मेयर, राज्य सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष और प्रदेश के मुख्य सचिव  पदेन सदस्य होंगे। इनके अलावा राज्य सरकार ऐसे पाँच सदस्यों को नामित करेगी जो नदी सरंक्षण, जल विज्ञान, पर्यावरण इंजीनियर और सामाजिक संगठन से जुड़े हुए विशेषज्ञ हों।

इसके अलावा एक कार्यकारी समिति होगी। इसके अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। पर्यावरण, वन, वित्त, शहरी विकास, परियोजना क्रियान्वयन, लोक निर्माण, आवास, विद्युत विभाग के प्रमुख सचिव, प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष, जल निगम के प्रबन्ध निदेशक, प्रधान वन संरक्षक, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता, निदेशक पर्यावरण, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अलावा पाँच सामाजिक कार्यकर्ता सदस्य होंगे। 

शहरी विकास विभाग के सचिव इसके पदेन सदस्य सचिव होंगे। ये समिति प्राधिकरण के कार्यक्रमों और परियोजनाओं के क्रियान्वयन का निरीक्षण और निगरानी करेगी। समय-समय पर प्राधिकरण को क्रियान्वयन की रिपोर्ट देगी। कार्यसमिति की बैठक कम से कम तीन महीने में एक बार जरूर होगी। राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के सदस्य राजेन्द्र सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार को चाहिए राज्य प्राधिकरण और कार्य समिति में ऐसे सदस्यों को रखे जो नदी के प्रति संवेदनशील हों।

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