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आईटी इकाइयाँ और कॉल सेंटर स्टाम्प शुल्क से मुक्त

प्रदेश सरकार ने आईटी इकाईयों और कॉल सेंटरों को स्टाम्प शुल्क से मुक्त कर दिया है। इसके साथ ही आईटी इकाइयों को परियोजना पूरी करने के लिए दो साल का अतिरिक्त समय भी देने का फैसला किया है। प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग के प्रमुख सचिव चंद्र प्रकाश ने बताया कि मौजूदा समय में आर्थिक मंदी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने उद्योगों को यह सहूलियतें देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के प्लाट आवंटियों को परियोजना पूरी करने के लिए दो साल का अतिरिक्त समय दिए जाने का निर्णय लिया गया है।

पहले जमीन कब्जा लेने से 42 महीने के अंदर सक्षम स्तर से प्लान का अनुमोदन कराना जरूरी होगा। इसके साथ ही पाँच साल के भीतर आवंटित की गई जमीन का 40 प्रतिशत एरिया कवर्ड करना होगा। पूरी परियोजना सात साल के अंदर पूरी करनी होगी। उन्होंने बताया कि अगर निर्धारित अवधि में परियोजना पूरी नहीं की गई तो इन इकाइयों को स्टाम्प शुल्क राशि शासन में जमा करनी होगी।

प्रमुख सचिव ने बताया कि कामर्शियल प्लाटों की गतिविधियाँ बढ़ाने के लिए  नई योजनाओं में 21 मार्च 2010 तक लीज रेंट की दरें भी कम करने का निर्णय लिया गया है। अब ढाई प्रतिशत लीज रेंट के बजाय सिर्फ एक प्रतिशत ही लीज रेंट लिया जाएगा। और एक मुश्त लीजरेंट जमा करने वालों को साढ़े 27 प्रतिशत के बजाय 11 प्रतिशत तक छूट जी सकती है। इसका निर्णय सम्बन्धित बोर्ड करेगा। आईटी क्षेत्र के प्लाटों में तेज काम हो, इसके लिए राज्य सरकार ने उनका एफएआर भी 50 प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय लिया है।

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