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नाबालिग को क्रूर-दम्पत्ति से मुक्त कराया

जमशेदपुर के एक  नाबालिक को बंधक बनाकर काम कराने वाले एक क्रूर दम्पत्ति की पोल अब जमशेदपुर-वासियों के सामने खुल गई है। इस दम्पत्ति ने बहाने से पीड़ित को घर में कैद कर रखा था।

प्रदीप अंडा रोल के ठेले पर ग्राहकों को प्लेट पहुंचाने वाले विजय देउरी को बेटे के समान रखने का झांसा देकर अमिताभ पालित अपने साथ ले गया था। बिष्टूपुर से विजय को ले जाने से पहले दंपति ने स्वयं को जुगसलाई का निवासी बताया था, लेकिन उसे ले जाया गया टेल्को। एमजीएम अस्पताल में विजय देउरी ने हिन्दुस्तान से बातचीत में यह बातें कहीं। उसने कहा कि सुबह दो रोटी और रात में थोड़ा भात देकर वे उससे दिनभर काम कराते थे। देर रात तक अमिताभ पालित और उसकी पत्नी का बदन दबाना पड़ता था। चोट से कराहते विजय ने कहा कि रात को ठीक से सोने नहीं दिया जाता था और भोर होते ही घरेलू काम में लगा दिया जाता था। नींद टूटने में लेट होने पर मार-पीट तो आम बात थी। विजय गांव के स्कूल में कक्षा पांचवीं तक पढ़ा है।

गौरतलब है कि शनिवार को जमशेदपुर पुलिस ने टेल्को कंपनी स्थित क्वार्टर में छापा मारकर विजय को बरामद किया था। उसे बंधक बनाने वाले अमिताभ पालित को हिरासत में लिया गया है। क्रूर दंपति के कब्जे से विजय के मुक्त होने की सूचना पर गांव के लोग उसे देखने रविवार को अस्पताल आए। उन्होंने बताया कि विजय की स्थिति जानकर पिता मंटू देउरी और मां प्रवासी देउरी की तबीयत बिगड़ गई है। विजय के अनुसार पांच भाई-बहनों में वह सबसे बड़ा है। पिता के कृषि कार्य से घरेलू खर्चा पूरा नहीं होने पर वह चाचा बंकिम देउरी के साथ कमाने जमशेदपुर आया था, लेकिन अमिताभ पालित दंपति के चक्कर में फंसकर लगभग ढाई वर्ष तक गुमनामी के अंधेरे में जीता रहा।


विजय को पटाने का प्रयास-
अमिताभ पालित के परिजन अब पीड़ित विजय एवं उसके चाचा को पटाने में लगे हैं, ताकि पुलिस की कार्रवाई से बचा जा सके। थाना हाजत में बंद अमिताभ की पत्नी शनिवार को देर रात एमजीएम अस्पताल भी गई। उसने विजय एवं उसके चाचा को आर्थिक रूप से मदद देने का आश्वासन दिया, जिससे वे आगे की कानूनी प्रक्रिया से दूर रहे। पुलिस विजय देउरी का कोर्ट में बयान कराने वाली है। विजय के चाचा बंकिम देउरी ने अस्पताल में पालित की पत्नी के आगमन की पुष्टि की है।


पुलिस को दी थी सूचना- 
टेल्को कॉलोनी के क्रास रोड नंबर दस के क्वार्टर से एक वर्ष पहले मौका मिलने पर विजय ने अपने घर फोन किया था। फोन पर ज्यादा बात नहीं हो सकी और संपर्क टूट गया। हालांकि, विजय ने फोन पर टेल्को में बंधक होने की बात कही थी, परिजन थाने भी गए और मोबाइल नंबर के आधार पर विजय को पुलिस ने तलाश भी किया, परन्तु मोबाइल मालिक द्वारा बोकारो का नंबर होने का झांसा देकर पुलिस की जांच को बरगला दिया गया। लेकिन छह नवंबर की रात अमिताभ पालित परिवार द्वारा कैटरिंग-कर्मियों के प्रयास से विजय के बंधक होने की बात खुल गई और वह पुलिस हिरासत में आ गया।

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