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हवा-पानी का सवाल

आने वाले वक्त में पर्यावरण हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा बनेगा। फौरी तौर पर दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हवा के प्रदूषण का मामला महत्वपूर्ण है और दीर्घकालीन महत्व की दृष्टि से ग्लोबल वार्मिग और कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन का मामला है, जिसका हमारे विकास की रणनीति पर गहरा असर पड़ेगा।

दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए हमारे जैसे लोकतांत्रिक देश में चीन जैसे उपाय नहीं किए जा सकते, जो उसने ओलंपिक के दौरान आजमाए थे। हम जबर्दस्ती कारखाने नहीं बद करवा सकते, न ही वाहनों को सड़क पर आने से रोक सकते हैं। हम धीरे-धीरे औद्योगिक प्रदूषण कम कर सकते थे और सार्वजनिक परिवहन को सुधार कर निजी वाहनों की जरूरत कम कर सकते थे।

दूसरी ओर हम ग्लोबल वार्मिग पर कड़ी सौदेबाजी कर भी लें तो भी यह स्पष्ट है कि ज्यादा दिन तक हम विकास विरुद्ध पर्यावरण का द्वंद्व बनाए नहीं रख सकते, वह वक्त आ चुका है, जब पर्यावरण का क्षरण विकास की गति को कम कर रहा है। सिर्फ यह नुकसान इस स्तर पर है, जहां वह साफ-साफ दिखाई नहीं देता। गंगा की सफाई के नाम पर गंगा एक्शन प्लान में बाईस साल में 1000 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं और गंगा की स्थिति वैसी की वैसी है। अब 15000 करोड़ रुपए में गंगा की सफाई की योजना है। 

यमुना की सफाई में भी दिल्ली में 1500 करोड़ रुपया खर्च हो चुका है और यमुना में गंदगी बरकरार है। यदि हम वक्त रहते इन नदियों को गंदा नहीं होने देते तो इतना पैसा बचा सकते थे और साफ पानी वाली नदियां हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती देतीं। इस प्रदूषण की मानवीय कीमत जो हम चुका रहे हैं वह और ज्यादा है।

लंदन के प्रतिष्ठित पत्र ‘द इकॉनॉमिक’ के मुताबिक भारत में रोज 10,000 बच्चों गंगा के प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से मरते हैं। कितने लोग अस्वस्थ होते हैं और उससे कितनी श्रम शक्ति का नुकसान होता है यह हिसाब लगाया जाए तो यह नुकसान हमारी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को काफी धीमी कर रहा है।

जाहिर है कम प्रदूषण वाली महंगी टेक्नोलॉजी हमें विकसित देशों से मिल सकती है और हम उसकी ठीक ही मांग कर रहे हैं, लेकिन इसमें टेक्नोलॉजी से ज्यादा महत्वपूर्ण इच्छाशक्ति है और वह कल्पनाशक्ति है जो पारंपरिक देसी टेक्नोलॉजी को नए संदर्भो में इस्तेमाल कर सके। यह जरूरी नहीं कि हम उस इतिहास चक्र से गुजरें, जिससे पश्चिमी देश गुजरे हैं। दो अंकों में विकास दर अब पर्यावरण की शुद्धता के साथ ही संभव है।

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