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विज्ञापन से ही बिजली नहीं बचेगी

सरकार विभिन्न विज्ञापनों के जरिए आम लोगों को बिजली की कीमत समझने और बिजली बचाने की हिदायत देती है। लेकिन वहीं दूसरी ओर कश्मीरी गेट, भजनपुरा, वजीराबाद की सड़कों पर पूरे दिन लैम्पपोस्ट जले रहते हैं। जो कभी बंद नहीं होते। सुबह-दोपहर-शाम हर वक्त जले दिखते हैं। यही हाल शास्त्री पार्क की हमेशा टूटी हुई पाइप लाइनों से लगातार गिरते पानी का भी है। जिसकी कभी मरम्मत नहीं कराई जाती। बिजली और पानी दोनों की बर्बादी को अगर यूं ही नजरअंदाज किया गया तो हमारे भविष्य के लिए ये चिंताजनक है।
वन्दना शर्मा, गौतम विहार, दिल्ली

नाव डूबने न दें
अकूत सम्पत्ति के स्वामी मधु कोड़ा की तरह पता नहीं कितने छुपे रुस्तम हैं। उन्हेंचाहिए कि भविष्य में अपयश से बचने के लिए अपनी सम्पत्ति को गरीबों में बांटना शुरू कर दें। नीति शास्त्र के अनुसार जब नाव में पानी बढ़ जाए और घर में धन दौलत बढ़ जाए तो दोनों हाथों से निकालो, अन्यथा नाव डूब जाएगी।
- 428, हरिनगर, नई दिल्ली

लुटेरों की जमात है यहाँ
हाल में हरिद्वार जाने का मौका मिला। ठहरने के लिए उचित और सस्ती जगह की तलाश में कई धर्मशालाओं और होटलों के चक्कर लगाए। अगले वर्ष वहां आयोजित होने वाले महाकुंभ के लिए पुलिस द्वारा कुछ हिदायतें मकान मालिकों को दी गई हैं। जो वहां सभी जगह शीशे के फ्रेम में दीवार पर टंगी दिखाई दी। परंतु इस नगरी का दुर्भाग्य है कि सरकार की अव्यवस्था का माहौल पूरे शहर में दिखाई देता है। पूरा शहर लुटरों का अड्डा बना हुआ है। होटल मालिक, चाय, प्रसाद बेचने वाले या फिर ऑटो चालक अथवा रिक्शा चालक पर्यटक को गिद्ध दृष्टि से देखते हैं। पवन कुमार झा, सहिपुर, शालीमार बाग, नई दिल्ली

आखिर ऐसा क्यों
गृहमंत्रालय का सुरक्षा के बहाने जम्मू और कश्मीर के लोगों का प्री-पेड मोबाइल कनेक्शन बंद करना बहुत ही पक्षपातपूर्ण रवैया है। केन्द्र सरकार के इस तरह की कार्यवाही से घाटी के लोगों का विश्वास सरकार के प्रति कम होगा। माना कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इन कनेक्शनों का गलत उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सभी लोग आतंकवादी हैं और कुछ लोगों की वजह से घाटी के 38 लाख लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़े।
मनोज रायकवार, जामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली

आश्चर्य की बात
जिस अंधविश्वास प्रधान देश में लोग आतंक मिटाने हेतु यज्ञ और रुद्राभिषेक यज्ञ करते हों, देवी मां को प्रसन्न करने के लिए जिन्दा बच्चों को जमीन में दफनाते हों। बेटे-बेटियों की सलामती के लिए भीख मांगी जाती हो, सरकार बचाने के लिए नेता द्वारा पशुओं की बलि दी जाती हो, उस अंधविश्वास प्रधान देश के जयपुर शहर के तेल डिपो में लगी भयंकर आग को बुझाने के लिए अगर कोई ‘धार्मिक’ या ‘नैतिकताहीन’ पूजा-पाठ, अरदास, दुआ, यज्ञ, हवन अथवा अखंड पाठ न करे तो यह महा आश्चर्यजनक है।
बी. एस. डोगरा, सीमापुरी, दिल्ली

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