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अब बहुरेंगे वनरक्षकों के दिन

जंगलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग रणनीति में बदलाव करेगा। पहली बार वनरक्षकों  पर फोकस किया जाएगा। विभाग वनरक्षकों की बुनियादी दिक्कतों को हल करने जा रहा है। सबसे पहला ध्यान उनकी वर्दी और सुरक्षा-उपकरणों पर दिया जाएगा। प्रदेश के जंगल को बचाने के लिए वनरक्षकों के साढ़े तीन हजार से अधिक पद स्वीकृत हैं। इनमें 600 से अधिक पद खाली हैं। वनरक्षकों के दजर्नों मुद्दे लंबे समय से अनसुलझों हैं। हाल के दिनों में उनका वेतन तो बढ़ गया लेकिन काम करने की स्थितियां बदतर हैं।

विभाग ने  निर्णय लिया कि पहले चरण में वर्दी-जूतों पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही सुरक्षा और संपर्क-उपकरणों को कमी पूरी की जाएगी। इस बारे में सभी डीएफओ से रिपोर्ट मांगी गई है। इसी क्रम में विभाग वनों के भीतर कर्मियों के आवाजाही के रास्ते, पानी के इंतजाम और आवास पर ध्यान केंद्रित करेगा।

वन विभाग में अभी तक बुनियादी ढांचे के विकास का ज्यादातर खर्च शहरी क्षेत्र में होता रहा है। मसलन, मालसी डीयर पार्क और लच्छीवाला जैसी जगहों पर सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन भ्यूंडार-घांघरिया या चोपता क्षेत्रों में वनरक्षक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

अपर प्रमुख वन संरक्षक डॉ. श्रीकांत चंदोला का कहना है कि विभाग ने खर्च की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। इस बार कठिन परिस्थितियों में कार्य कर रहे कर्मियों पर ज्यादा खर्च किया जाएगा।

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