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ई-होम्स : आशियाने नए जमाने के

ये अब नई बात नहीं रह गई कि टेक्नोलॉजी हर असंभव को संभव बना रही है। तकनीक तकरीबन हर क्षेत्र में अपना कमाल दिखा रही है। फिर चाहे, वह आर्किटेक्चर और डिजाइन का क्षेत्र क्यों न हो। पिछले दो-तीन सालों में ई-होम का कांसेप्ट भारत में भी तेजी से बढ़ा है। दुनिया भर में ई-होम के बारे में लोगों की अपनी-अपनी परिभाषाएं हैं। कोई इसे इलेक्ट्रॉनिकली ऑपरेटेड होम के तौर पर देखता है, तो कोई इसे इको-फ्रेंडली होम की नज़र से, तो किसी की नजर में ये इंटरटेनमेंट और अर्थक्वेक रजिस्टेंट होम हैं। वैसे तो ई-होम्स की कई प्रचलित परिभाषाएं हैं, लेकिन मुख्यत: ई-होम्स चार तरह के होते हैं।

इको-फ्रेंडली
ऊर्जा संरक्षण, हाइजेनिक और पर्यावरण बेहतर बनाने के लिए, इको फ्रेंडली घर बनाने के लिए फोम कंकरीट ब्लॉक का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह से बेहतर थर्मल इंसुलेशन होता है। यही नहीं, इन मकानों में सिंक से आने वाले पानी को रिसाइकल करके उसका इस्तेमाल टॉयलेट और बगीचों की सिंचाई के लिए किया जाता है। इसके अलावा, बिल्डिंग में ऐसे पेंट का प्रयोग किया जाता है, जो जहरीले न हों और इससे बिल्डिंग की हाइजीन क्षमता पर किसी तरह का प्रभाव न पड़े। साथ ही बिजली बचाने के लिए लाइटनिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर कॉरिडोर की लाइट हमेशा बंद रहती है, पर किसी के आने पर एकदम से सेंसर ये पता कर लेते हैं कि कोई आने वाला है और उस क्षेत्र की बिजली ऑन हो जाती है।

भूकंप रोधी
मिट्टी के प्रकार, बिल्डिंग फाउंडेशन, मैटीरियल और डिजाइन को ध्यान में रखना।
इलेक्ट्रॉनिकली ऑपरेटेड घर के सिस्टम और सिक्योरिटी को नियंत्रित करने के लिए। इस होम का सबसे मुख्य फीचर सिक्योरिटी होता है, फ्रंट डोर कंट्रोल। यह लॉक तीन तरीके से नियंत्रित होता है। पहला मैग्नेटिक कार्ड द्वारा, दूसरा आपके मोबाइल फोन से और तीसरा आपकी चाभी से। घर में किसी व्यक्ति के आने पर आप इसे सामने के दरवाजे के पास लगे कैमरे से देख सकते हैं और उससे बात कर सकते हैं। वहीं इस्तेमाल के लिए आप उसकी तस्वीर भी ले सकते हैं। ऐसा उस दौरान भी होगा, जब आप घर पर नहीं होंगे और जब आप घर वापस लौटेंगे तो आपको उन लोगों की तस्वीरें मिल जाएंगी जो दरवाजे के सामने आए होंगे, भले ही उन्होंने घंटी न बजाई हो। अगर इस सिस्टम को रिमोट के द्वारा एक्सेस करते हैं तो आप इंटरनेट के द्वारा इनकी जानकारी पता कर सकते हैं। अगर किसी कारणवश खिड़की टूटती है तो घर में लगे सेंसर एसएमएस या ई-मेल इस बात की इत्तला दे देंगे कि घर में कुछ हुआ है।

मनोरंजन
घर के साथ उपलब्ध सुविधाएं। इन घरों में मनोरंजन के साथ-साथ सामुदायिक सुविधाएं जैसे हैल्थ क्लब, स्विमिंग पूल, होम थिएटर, सामुदायिक लाइब्रेरी, बिलियर्ड्स रूम, स्टीम रूम होते हैं। इसका सबसे मुख्य फीचर ये होता है कि रहने वाला व्यक्ति इन सभी सुविधाओं को इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम के द्वारा जांच सकता है। 

ऊर्जा की खपत को कम करने वाले घर
दिन-ब-दिन बढ़ रही ऊर्जा की खपत को कम करने और ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से बचने के लिए वैज्ञानिक नए तरीके के घर बनाने में लगे हुए थे। इस दिशा में यूरोप में पहल की गई है। वहां कई ऐसे घरों का निर्माण किया जा रहा है जो ऊर्जा का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर सकें। वैज्ञानिक कहते हैं कि घरों में दीवारों और छतों के माध्यम से तकरीबन 75 प्रतिशत ऊष्मा परावर्तित हो जाती है, जिसका समुचित उपयोग नहीं हो पाता है। हालांकि कभी तकनीक महंगी होने के कारण, तो कभी ऊर्जा का इस्तेमाल न कर पाने के कारण परिणाम सिफर ही रहा।

नायाब पहल
पहली बार ऐसे घरों का निर्माण स्वीडन में किया गया था। इन घरों को इंसुलेटेड, हवारोधक बनाया जाता है। बाहर से आने वाली हवा को पहले ही भूमिगत नलिकाओं द्वारा ऊष्मा दे दी जाती है। यह भूमिगत नलिकाएं बालू मिट्टी के द्वारा ऊष्मा का आदान-प्रदान करती हैं। इन घरों में दीवारें और खिड़कियां ऐसी बनाई जाती हैं कि सूर्य की रोशनी कमरों में ज्यादा से ज्यादा पहुंचे। वैज्ञानिक कहते हैं कि हालांकि इन घरों को बनाने में लागत आम घरों की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा आती है, लेकिन ऊर्जा के मामले में यह आम घरों के मुकाबले खासे बेहतर होते हैं।

शोधकर्ता मानते हैं ऊर्जा की बचत के लिए घरों में इंसुलेशन को बेहतर बनाना जरूरी है, इससे ऊर्जा की खपत को कम किया जा सकता है। मसलन टपकती हुई छत में पानी के संघनन के कारण जाया हो जाने वाली ऊर्जा को इंसुलेशन के द्वारा बचा सकते हैं। इंसुलेशन को बेहतर करने के लिए अटारी और दीवारों के कोनों, दरारों को फोम के द्वारा पैक कर दिया जाता है। इससे फायदा ये होगा कि दिन के दौरान यह बाहर की ऊष्मा को अवशोषित करेंगे और रात्रि के समय एकत्रित हुई इस ऊष्मा को छोड़ देंगे।

और भी हैं तरीके
इंसुलेशन के अलावा भी कई ऐसे तरीके हैं, जिनसे भविष्य का स्मार्ट होम बनाया जा सकता है। सेंसर को इंस्टाल करने से यह फायदा होगा कि किसी व्यक्ति के कमरे में प्रवेश करने से पहले ही ऊष्मा और प्रकाश के आधार पर इस बात का पता चल जाएगा कि कोई कमरे में आने वाला है। इसके अलावा को-जेनरेशन सिस्टम भी खासा मददगार माध्यम है, यह ऊष्मा और बिजली को घर के अंदर और बाहर दोनों जगह से
बनाता है।

यह फ्यूल सेल, जिसमें इथेनॉल का इस्तेमाल होता है या फिर माइक्रो-टरबाइन जिनमें प्राकृतिक गैस प्रयुक्त होती है, के आधार पर काम करता है। को-जेनरेशन सिस्टम का फायदा यह है कि यह बेकार ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली बनाने में करता है।

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