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टेलीकॉम क्षेत्र में मिनट्स-सेंकेड्स की जंग

भारतीय टेलीकॉम बाजार में सरकारी और निजी दूरसंचार कंपनियों के बीच छिड़ी प्रतिस्पर्धा ने उपभोक्ताओं को एक साथ कई विकल्प दिए हैं। इन कंपनियों की ओर से शुरू की गई प्रति सेकेंड योजना ने मिनट्स और सेकेंड्स प्लान को लेकर उपभोक्तओं के बीच असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

विश्व के सर्वाधिक तेजी से उभरते टेलीकॉम बाजार में से एक भारतीय बाजार में दिग्गज कंपनियां अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और नए उपभोक्ताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए लगातार आकर्षक योजनाएं उतारने में लगी है। टेलीकॉम कंपनियों के बीच करीब एक दशक से कॉल दरों में मिनट्स को लेकर जारी घमासान अब मिनट्स से बदलकर सेकेंड्स में पहुंच चुका है, लेकिन इन सबके के बीच उन उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उनके लिए प्रति मिनट का प्लान ज्यादा बेहतर है या फिर प्रति सकेंड प्लान।

सीडीएमए तकनीक के जरिए इंडिकॉम ब्रांड के नाम से देश के अधिकतर क्षेत्रों में अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रही है। टाटा टेलीसर्विसेज लिमिटेड ने अपने जीएसएम आधारित सेवा टाटा डेकोमो की लाचिंग के मौके पर धमाकेदार घोषणा करते हुए भारतीय टेलीकॉम बाजार के लिए अपनी तरह की बिल्कुल नई प्रति सेकेंड बिलिंग की क्रांतिकारी योजना शुरू कर, अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों को इस ओर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने प्रति सेकेंड योजना को उपभोक्ताओं के हित में बताते हुए कहा कि इस संबंध में सभी प्रमुख कंपनियों से बातचीत की है। इससे पूर्व की ट्राई इस मामले में आगे बढ़ती टेलीकॉम क्षेत्र में छिड़ी प्रतिस्पर्धा ने एयरटेल, रिलायंस, आईडिया, एयरसेल, वोडाफोन, एमटीएस समेत सभी कंपनियां पिछले एक माह के दौरान प्रति सेकेंड-प्लस प्लान के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। हालांकि प्रति मिनट्स के मौजूदा प्लान से प्रति सेकेंड प्लान में जाने वाले उपभोक्ताओं को एक निश्चित राशि का भुगतान करना पड़ रहा है, वहीं कई कंपनियां यह सेवा बिना शुल्क के भी उपलब्ध करा रही हैं।

मिनट्स और सेंकेड्स प्लान को यदि तुलनात्मक दृष्टिकोण से देखा जाए तो आदित्य बिड़ला समूह की आइडिया सेल्यूलर ने प्रीपेड के मौजूदा ग्राहकों को आठ, जबकि नए ग्राहकों को मात्र चौदह रुपए में एक साल के लिए प्रति सेकेंड सुविधा दे रही है। वहीं इसके अलावा जो उपभोक्ता मिनट्स प्लान से संतुष्ट हैं और इसी प्लान के साथ रहना चाहते हैं। कंपनियों ने अधिक बातचीत करने वाले उपभोक्ताओं की जरूरतों का ध्यान रखते हुए पूर्व से कई अनलिमिटेड वाउचर और सैकडों अन्य वाउचर उपलब्ध करा रखा है।

प्रति सेकेंड की संकल्पना के साथ ही प्रति मिनट प्लान के जारी रहने से उपभोक्ताओं में प्लान के चुनाव में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रति सेंकेड कॉल दर की वकालत करने वाले टेलीकॉम क्षेत्र के विशेषज्ञों को अब नहीं सूझ रहा कि किसका भविष्य बेहतर है। प्रति सेंकेड प्लान के आरंभ होने के बाद से जिन उपभोक्ताओं ने इस प्लान के साथ खुद को जोड़ लिया था, उन्हें अब ऐसा महसूस होने लगा है कि पूर्व का विकल्प कहीं बेहतर था। हालांकि कम बातचीत करने वाले लोगों को प्रति सेकेंड विकल्प अधिक भा रहा है। प्रति सेंकेड बनाम प्रति मिनट के भंवर जाल में उपभोक्ता इस कदर उलझ चुके हैं कि कुछ मौके को छोड़कर अधिकांश मौकों पर उपभोक्ताओं को इससे फायदा कम नुकसान ज्यादा दिख रहा है। क्योंकि अधितकर कॉल 30 से 50 सेंकेड्स में खत्म होती है।

वर्तमान समय में अधिकतर कंपनियां प्रति मिनट लोकल और एसटीडी कॉल के लिए 50 पैसे वसूल रही हैं, वहीं प्रति सेंकेड प्लान में यह बढ़कर एक पैसे प्रति सेंकेड से यह 60 पैसे बैठती है। टेलीकॉम विशेषज्ञ भी अब यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि कॉल दरों को लेकर जारी जंग का अंत कब होगा।

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  • Web Title:टेलीकॉम क्षेत्र में मिनट्स-सेंकेड्स की जंग