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वाडा नियम के पक्षधर नहीं है अजहर

वाडा नियम के पक्षधर नहीं है अजहर

पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरूददीन ने रविवार को कहा कि वे विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) नियमों के पक्षधर नहीं है क्योंकि क्रिकेटरों के लिये ठहरने के स्थान की जानकारी देना काफी मुश्किल है।

अजहर ने रविवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा कि मैं इसमें टीम इंडिया के खिलाड़ियों से सहमत हूं। मैं थोड़ा सा इसके खिलाफ हूं। अगर आपको जांच करनी है और आपको किसी एक विशेष खिलाड़ी पर शक है तो आप उससे बात कीजिये और किसी भी टूर्नामेंट के बाद या पहले उसकी जांच कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि क्रिकेटरों के लिये यह काफी मुश्किल है।

अपने समय में क्रिकेट में डोपिंग के बारे में पूछे जाने पर इस 46 वर्षीय पूर्व कप्तना ने कहा कि 25 साल पहले डोपिंग के मामले नहीं पाये जाते थे। उन्होंने कहा कि उस समय क्रिकेट में डोपिंग के इतने मामले नहीं होते थे। यह 25 साल पहले की बात है। मुझे याद है कि जब मैं इंग्लैंड में काउंटी खेला करता था तो वे रैंडम जांच किया करते थे।

अजहर इस उम्र में भी काफी फिट हैं, लेकिन स्पोटर्स मेडिसिन नहीं होने की वजह से उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि फिटनेस किसी भी खिलाड़ी की जीवनचर्या का हिस्सा होना चाहिए। भले ही खिलाड़ी क्रिकेट छोड़ चुका हो। मैं देखता हूं हमारी भारतीय टीम में एक-दो खिलाड़ी ऐसे हैं, जिनका थोड़ा पेट निकला हुआ है।

अजहर ने कहा कि अगर खिलाड़ी फिट होगा तो उसे चोटों की समस्या से भी रूबरू नहीं होना पड़ेगा। हालांकि मैं यह भी मानता हूं कि उन्हें अपनी फिटेनस कार्यक्रम को पूरी तरह से निभाना चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि क्या खिलाड़ी जानते हैं कि वे सही तरह से फिटनेस कार्यक्रम के मुताबिक काम कर रहे हैं या नहीं तो उन्होंने कहा, पता नहीं वे जानते हैं या नहीं। लेकिन उन्हें कड़ाई से ट्रेनिंग करनी चाहिए। जब उन्हें 3-4 हफ्ते का आराम मिलता है तो वे पूरी तरह से आराम करते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा कतई नहीं होना चाहिए। यहीं से चोट की जड़ शुरू होती है। चार हफ्ते के बाद वे सीधे क्रिकेट खेलना शुरू कर देते हैं, जिससे चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। खिलाड़ी को एक हफ्ते के आराम के बाद दूसरे हफ्ते से फिटनेस कार्यक्रम शुरू कर देना चाहिए। घर पर वे खाने की चीजों पर भी ध्यान नहीं देते। जब खिलाड़ी क्रीज पर उतरे तो उन्हें 90 प्रतिशत फिट होना चाहिए।
    
अजहर ने अपने अनुभव के बारे में कहा कि रिलायंस विश्व कप के दौरान तीसरे या चौथे मैच में मुझे चोट लगी थी, लगातार दर्द हो रहा था। फिर मुझे दर्द दूर करने के लिये करीब 25 से 30 कोर्टिसोन के इंजेक्शन लेने पड़े। लेकिन इसकी जड़ का पता नहीं लग सका जिसके कारण मैं पांच साल तक परेशान रहा और मेरा क्रिकेट कैरियर भी प्रभावित हुआ।

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