DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राष्ट्रगीत वंदेमातरम के शब्द वंदे के अर्थ को साफ करने की जरूरत

राष्ट्रगीत वंदेमातरम के गायन के विरोध में दारूल उलूम, देवबंद के हाल ही में जारी किये गये फतवे से स्वयं को दूर रखते हुए मुस्लिम बुद्विजीवियो एवं विद्वानों ने राष्ट्रगीत के एकमात्र आपत्तिजनक शब्द वंदे का अर्थ स्पष्ट करके इसके गायन को लेकर मुस्लिम समाज के संदेह को दूर किये जाने पर बल दिया है।

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं प्रख्यात शिया उलेमा मौलाना कल्वे सादिक ने कहा कि हिन्दी साहित्यकारों को राष्ट्रगीत के वंदे शब्द को परिभाषित करके उसका अर्थ स्पष्ट करना चाहिए, जिसके आधार पर कतिपय मुस्लिम उलेमा राष्ट्रगीत के गायन को इस्लाम धर्म के विरूद्व मानते हैं।

कल्बे सादिक ने कहा कि उन्हें निजी तौर पर केन्द्रीय अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद की यह दलील मानने में कोई आपत्ति नही है कि स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में मौलाना अबुल कलाम आजाद ने वंदेमातरम गीत के कुछ शब्दों को हटा कर उसे राष्ट्रगीत के रूप में अपनी मंजूरी प्रदान कर दी थी।

मौलाना सादिक ने कहा कि यदि वंदे का अर्थ मातृभूमि के लिए आदर और सम्मान व्यक्त करने से है। यह संस्कृत, हिन्दी और उर्दू सहित्यकारों एवं विद्वानों का दायित्व है कि वे आपस में बैठकर, विचार विमर्श करके इसके अर्थ को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करें।

उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि यदि विद्वानों की राय में वंदे शब्द का अर्थ पूजा और इबादत है तो फिर यह शब्द इस्लाम की दृष्टि से मुसलमानो को स्वीकार्य नहीं है, कारण कि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी और के इबादत की इजाजत नहीं है।

आल इंडिया शिया पर्सनल ला बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मिर्जा मोहम्मद अतहर ने भी मौलाना सादिक की राय से सहमति जताते हुए दारूल उलूम द्वारा जारी फतवे के समय  पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे तो सांप्रदायिक भावनाएं ही भड़केंगी।

उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि हिन्दी और संस्कृत के विद्वान यह सुनिश्चित करें कि आपत्तिजनक समझा जाने वाला शब्द वंदे है अथवा बंदे।

मौलाना अतहर ने यह भी कहा कि जहां तक उन्हें मालूम है, यह शब्द वंदे है जिसका अर्थ सम्मान व्यक्त करना है और इस पर मुसलमानों को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह इस्लाम की भावना के विपरीत नहीं है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा, आवश्यकता इस बात की है कि लोगों को समझाया जाये कि वंदे का आशय मातृभूमि की पूजा करने से नहीं है, जैसी कि सालों से आम धारणा सी बन गई है।

आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल ला बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने कहा कि राष्ट्रगीत के विरुद्ध ताजा फतवे ने सांप्रदायिक और प्रतिक्रियावादी ताकतों को मुस्लिम समाज की आलोचना करने का मौका दे दिया है।

अम्बर ने आगे कहा कि जो लोग इस गीत के गायन को राष्ट्रभक्ति का प्रतीक मानते हैं, वे गलत बात करते हैं और उनसे मेरा सवाल सिर्फ इतना है कि क्या राष्ट्रगीत गाने वालों ने कभी कोई गलती (राष्ट्रविरोधी काम) नहीं किया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:वंदेमातरम के वंदे के अर्थ को साफ करने की जरूरत