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अरुणाचल दौरा गैर राजनीतिक, चीनी विरोध आमः दलाई लामा

अरुणाचल दौरा गैर राजनीतिक, चीनी विरोध आमः दलाई लामा

भावुक दलाई लामा ने अरुणाचल प्रदेश की अपनी यात्रा का विरोध किए जाने पर रविवार को चीन की आलोचना की और तवांग पर चीन के दावे पर हैरानी जताई।

तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता इस कस्बे की चार दिवसीय यात्रा पर रविवार को यहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि उनकी यहां की यात्रा गैर राजनीतिक है। उन्होंने अपनी यात्राओं पर चीन के विरोध को आम बात बताई।

उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए संवाददाताओं से कहा कि चीन की जनशक्ति सेना ने तवांग पर कब्जा कर लिया था और उस साल बोम डिला तक पहुंच गए थे।

तवांग पर चीन के दावे का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन तत्कालीन चीनी सरकार ने एकतरफा युद्धविराम घोषित कर दिया और अपनी सेना वापस बुला ली। अब चीन सरकार के अलग विचार हैं। मैं हैरान हूं।

उनकी यात्रा पर चीन के विरोध पर दलाई लामा ने कहा कि यह सामान्य बात हैं। मैं जहां कहीं जाता हूं वे विरोध करते हैं। यह पूरी तरह आधारहीन है। मेरी हर गतिविधि पर चीनी सरकार काफी दुखी रहती है। मेरी यहां की यात्रा गैर राजनीतिक है।

उन्होंने कहा कि यहां आकर वह भावुक हैं । तिब्बत से भागते वक्त 1959 में वे यहां से गुजरे थे। दलाई लामा ने कहा कि मैं भावुक हूं। जब मैं भागा था तब मानसिक दबाव में था। मैं निराश था। लेकिन तब मैंने सीमा पर कृष्ण मेनन तथा विदेश मंत्रालय के अन्य अधिकारियों को देखा और मैंने सुरक्षित महसूस किया।

उन्होंने कहा कि लिहाजा, अब मैं यहां आकर काफी खुश हूं। मैं जहां कहीं जाता हूं मेरा मकसद मानवीय मूल्यों का संवर्धन होता है। अभी मैं जापान से लौटा हूं जहां मैंने बताया कि खुशी का स्रोत हमारे भीतर है। आध्यात्मिक नेता से पूछा गया कि क्या चीन के लिये उनका कोई संदेश है। उनका जवाब था कि कुछ नहीं।

उन्होंने कहा कि तिब्बत बौद्ध क्षेत्र और संस्कृति एक कठिन दौर से गुजर रही है। दलाई लामा ने कहा कि लिहाजा इस देश में और इस इलाके में तिब्बती बौद्ध धर्म तथा संस्कृति के सरंक्षण की वास्तविक जिम्मेदारी लोगों की है। तिब्बती शरणार्थी समुदाय के कई लोग, खासकर युवा मठों तथा विभिन्न तिब्बती संस्थानों से जुड़ रहे हैं, जो काफी उत्साहवर्धक संकेत है।

उन्होंने कहा कि खासकर दक्षिण भारत में ऐसे 2000 सामुदायिक सदस्य संस्थानों से जुडे़ हैं और स्थानीय लोग बौद्ध धर्म के अध्ययन तथा संस्कृति के संरक्षण में वास्तविक रुचि दिखा रहे हैं ।


अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे के बारे में दलाई लामा ने कहा कि इस मुद्दे पर आप मेरे विचार जानते हैं। तिब्बत मुद्दे पर पूछे गये एक सवाल पर उन्होंने कहा कि चीन को अपनी तिब्बत नीति स्पष्ट करनी चाहिये।

तिब्बती धर्मगुरू ने कहा कि जब तक वे स्पष्ट नहीं करते तब तक उनसे बातचीत का कोई मतलब नहीं है। मेरे बारे में उनके विचार समय-समय पर बदलते रहते हैं। उनके विचारों में अंतर है।

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