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औलाद के लिए 15 शादी रचा डालीं, फिर भी हसरत अधूरी

औलाद की हसरत पाल 15 शादी रचा डाली लेकिन उत्तर प्रदेश में ज्योतिबाफूलेनगर के वहीद की हसरत अब तक पूरी नहीं हुई है और उनकी उम्मीदों का सफर अभी जारी है।

ज्योतिबाफूलेनगर के रायपुर कलां गांव के रहने वाले 66 वर्षीय अब्दुल वहीद की पहली शादी 1960 में डिडौली इलाके के गांव सहसपुर की नफीसा के साथ हुई थी। औलाद तो दूर नफीसा उनका साथ छोड दुनियां से ही चली गई। अट्ठारह बीघा जमीन के मालिक वहीद ने दूसरी शादी 1965 में कलाम छापा इलाके की हया के साथ की। उससे निकाह करके भी औलाद की हसरत पूरी नहीं हुई तब 1972 में तीसरी शादी बिहार की कुलसुम से रचा डाली।

चौथी शादी निशा फातिमा के साथ 1974 में तथा पांचवीं शादी सकीना के साथ 1977 में हुई। छठी शादी उन्होंने 1980 में परवीन के साथ तथा सातवीं शादी 1983 में शहनाज के साथ की। राबिया के साथ 1989 में आठवां निकाह तथा गुजरात के अहमदाबाद की जलीना के साथ नौवां विवाह किया।

अब्दुल वहीद ने दसवीं शादी 1994 में नूरजहां के साथ की तो 1995 में दिलबरी को दिल दे बैठे और 11वीं शादी रचा डाली। उन्होंने 12वीं शादी 1998 में पश्चिम बंगाल की आसमीन से की तथा 13वीं शादी 2001 में फरहत से।

वहीद ने 14वां निकाह अमरोहा की हूरबानों के साथ किया तथा 15वीं शादी एक जनवरी 2008 में अमरोहा के मुहल्ला बटवाल की रहने वाली फरजाना के साथ रचाई। इस तरह वहीद अमरोहा शहर के नौ मुहल्ले में दुल्हा बन कर गए। तीन बार बिहार में तथा एक एक बार पश्चिम बंगाल और गुजरात में दुल्हा बने।

वहीद की पहली और 14वीं पत्नी का इंतकाल हो गया जबकि अन्य बारह से उनका मन भर गया या वे उन्हें औलाद नहीं दे सकीं। सच का सामना को सर्वश्रेष्ठ टेलीविजन धारावाहिक मानने वाले वहीद अब 16वीं शादी के बारे में भी सोच रहे हैं। उन्हें मौका मिलता तो वह सच का सामना में दर्शकों के सामने सच्चाई कबूल करते।

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