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सभी निर्दलीय विधायकों को मिली लालबत्ती

यह कोई अजीब संयोग नहीं है, बल्कि इसे राजनीतिक मजबूरी कहा जाएगा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशियों को मात देकर विधानसभा में पहुंचने वाले सभी निर्दलीय विधायक कांग्रेस सरकार में ही लालबत्ती वाली गाड़ी के हकदार बन बैठे। शपथ ग्रहण समारोह में निर्दलीय विधायकों के चेहरों पर जीत का आलम तो वहीं कांग्रेसी नेताओं की मजबूरी साफ झलक रही थी। विपक्षी नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी के लोस सांसद, कई विधायक व पूर्व मंत्री भी शपथ ग्रहण समारोह से नदारद रहे।

चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधने वाले सभी निर्दलीय विधायक शपथ ग्रहण समारोह के दौरान खास आकर्षण का केंद्र बने रहे। मंत्री एवं मुख्य संसदीय सचिव की शपथ लेने के बाद निर्दलीय विधायक जब मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंहु हुड्डा के साथ मंच पर बैठे तो समारोह में मौजूद कांग्रेसी विधायकों के चेहरे उनकी मजबूरी का इजहार  करने के लिए काफी थे।

लालबत्ती पाने वाले सुल्तान सिंह, प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, गोपाल कांडा, सुखबीर कटारिया, जलेब खां व शिवचरण लाल शर्मा ने विस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को हराया था। कैबिनेट मंत्री बने निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश जैन ने इनेलो उम्मीदवार को पराजित किया था। कांग्रेस पार्टी को सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने वाले सभी निर्दलीय विधायकों को सरकार में पद मिलना उनके दबाव को साफ दर्शाता है।

निर्दलीय विधायक गोपाल कांडा को मंत्री पद मिलने के बाद जब उनसे पूछा गया कि उन्हें किस मेरिट के आधार पर यह जिम्मेवारी मिली है तो उनका जवाब था कि इस बारे में मुख्यमंत्री बेहतर जानते हैं। ऐसा ही कुछ हाल मुख्य संसदीय सचिव बनाए गए जलेब खां का रहा। जलेब खां का कहना था कि उन्हें शुक्रवार की देर रात तक मंत्री पद दिए जाने का भरोसा मिला था, लेकिन अब उन्हें संसदीय सचिव बना दिया गया है। लिहाजा उन्हें कोई ज्यादा खुशी नहीं है।

सुखबीर कटारिया की देरी ने चौंकाया

सुखबीर कटारिया को छोड़कर अन्य सभी निर्दलीय विधायक समय से पहले ही राज भवन पहुंच गए थे। निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश जैन, गोपाल कांडा व शिवचरण लाल शर्मा को मंत्री पद की शपथ दिलाने के बाद
जब सुखबीर कटारिया का नाम पुकारा गया तो वे मंच पर नहीं पहुंचे। शपथ ग्रहण समारोह में कटारिया की अनुपस्थिति ने एकाएक कई तरह के सवाल खड़े कर दिए, लेकिन तभी मंच से घोषणा कर दी गई कि वे रास्ते में हैं और दोपहर एक बजे मंत्री पद की शपथ लेंगे। समारोह खत्म होने के बाद कटारिया को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। 

.. और यह भी एक रिकार्ड बन गया

राज्य की मुख्य सचिव ऊर्वशी गुलाटी ने जब मंत्रियों और मुख्य संसदीय सचिवों को शपथ दिलाने की उद्घोषणा व अन्य औपचारिकताएं पूरी की तो एक वह भी एक रिकार्ड बना गया। हरियाणा बनने के बाद सरकार के गठन, मंत्रियों या मुख्य संसदीय सचिवों को शपथ दिलाने के लिए अब से पहले तक जितने भी समारोह आयोजित हुए, उनमें से मंच की कार्यवाही मुख्य सचिवों के रूप में पुरुषों ने ही निभाई थी।

शनिवार को पहला अवसर था कि राज्य के मुख्य सचिव की जिम्मेदारी संभाले किसी महिला अधिकारी ने इस कार्यवाही को अंजाम दिया। खास बात है कि इससे पहले जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उस वक्त मुख्य सचिव धर्मवीर ने मंच की औपचारिकताएं पूरी की थी। ध्यान रहे कि ऊर्वशी गुलाटी से पहले प्रोमिला ईस्सर व मीनाक्षी आनन्द चौधरी ने ही इस पद को सुशोभित किया है। उक्त दोनों महिला अधिकारी भी कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्य सचिव के पद पर रहीं।

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