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दो दिन तक आंख चिलमलाने वाले धुंध से राहत नहीं

शनिवार की सुबह सूर्यदेव ने दर्शन नहीं दिए। अलसाते लोग घर से निकले तो आंखों में जलन होने लगी। सांस की बीमारी वाले लोगों के लिए और आफत थी। प्रदूषण के कारण धुआं और मौसम के कारण धुंध ने मिलजुलकर अंधेरे के जरिए आफत डाल दी। संकट इतना था कि कार में एसी चलाना भी मुश्किल हो गया। धुंध से स्वयं मौसम विभाग वाले आश्चर्यचकित थे  तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग के लोग परेशान रहें,क्योंकि धुंध का कारण साफ नही था। हालांकि अचानक आई धुंध को डाक्टरों ने खतरनाक बताया और कहा कि दमे वाले मरीजों को काफी दिक्कतें हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार यह धुंध अभी दो दिन तक रह सकती है।


मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वातावरण में कुछ सौ मीटर की ऊंचाई पर ‘कन्वरसन लेयर’ बन गई है, जिसमें प्रदूषण के कण अटक गए हैं। स्वास्थ्य के लिए यह काफी नुकसानदेह है। सूरज की रोशनी में बाधा बनी धुंध से दोपहर के तापमान में भी गिरावट हुई है। शनिवार तड़के सुबह से ही धुंध थी जो पूरे दिन छाई रही। हवा में शुद्धता का नामोनिशान नहीं था। ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट से सांस लेने में लोगों को दिनभर परेशानी हुई।
मौसम पूर्वानुमान केंद्र के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस सीजन में वातावरण में इस तरह की स्थिति पैदा हो सकती है। सूरज की रोशनी नहीं पहुंचने की वजह से दोपहर में पारे में तकरीबन दो डिग्री की गिरावट हुई है। लेकिन, मौसम विभाग भी प्रदूषण के स्तर के कारण धुंध के खतरनाक होने पर चिंतित है। विभाग के अनुसार दो दिनों तक धुंध के छाए रहने की आशंका है। साथ ही तापमान में भी गिरावट होगी।

धुंध से क्या हो रही है परेशानी
आखों में जलन
सांस लेने में तकलीफ
कारो में एसी चलाने में दिक्क्त
सलाह
आखों के बार बार पानी से धोए
दमे वाले मरीज घरों से कम बाहर निकले
‘‘वातावरण में इनवरसेवल लेयर बन गई है, जिसमें प्रदूषण के कण अटक गए हैं। मैदानी इलाकों से पहाड़ों पर जाने पर तापमान में गिरावट होती है, लेकिन इस समय स्थिति इसके उलट है। नीचे से ऊपर जाने पर तापमान में वृद्धि हो रही है। प्रदूषण का घनत्व इतना ज्यादा हो गया कि यह धुंध के रूप में दिखाई दे रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने पर ही इस स्थिति से निजात मिल सकती है।’’
डॉ. रंजीत सिंह
मौसम वैज्ञानिक

‘‘दिल्ली और एनसीआर में तेजी से चल रहे निर्माण कार्यो की वजह से धूल के कण भी प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण और इसका असर इस समय वातावरण में दिखाई दे रहा है।’’यही नहीं जहां प्रदूषण मात्र अधिक है वहां धुंध का असर काफी है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड


‘‘यह धुंध स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी नुकसानदेह है। आंखों में एलर्जी और जलन की समस्या होगी। सांस के मरीज बढ़ेंगे। ऐसे मरीज जिन्हें दमे और सांस संबंधी बीमारियों की शिकायत है, उन्हें कभी भी अस्थमा का अटैक पड़ सकता है। एहतियात बरतें।’’
डॉ. रेनू अग्रवाल, सीनियर फिजीशियन
जिला अस्पताल, सेक्टर-39

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