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नए जिले में शामिल होते जमीनों की मारामारी शुरू

कुछ वर्षो पूर्व तक यहां जमीनों को इतनी तबज्जो नहीं दी जाती थी, लेकिन 1997 में नये जिले में शामिल होने के बाद जैसे ही भाव बढ़ने शुरु हुए लोगों में जमीन के लिए मारामारी शुरु हो गई। पिछले वर्षो क्षेत्र में इंटर नेशनल एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे, आवासीय सेक्टरों जैसी योजनाओं के प्रस्ताव हुए। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरु हुई तो जमीन के छोटे-छोटे टुकडों की कीमत लाखों करोड़ों में पहुंच गई है। जिससे देखते हुए लोग हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देने से नहीं डर रहे है। अब उधर जमीन के लिए लोग अपनों का खून करने से भी नहीं झिझक रहे हैं।

पिछले वर्षों जमीनी विवाद में हुई हत्याओं के कुछ चर्चित मामले
 धुमखेड़ा गांव में भाई ने कार न दिलाने पर भाई की हत्या की,भाभी की भी हत्या का प्रयास
 संपत्ति बटवारे में जमीन नहीं दिए जाने पर गांव करौली में बेटे ने बाप की चाकू से गोदकर हत्या की
 आछेपुर गांव में 150 गज के पट्टे पर विवाद के चलते दलित खचेडू की गोली मारकर हत्या
 तीन साल पहले भूमि हथियाने के लिए रबूपुरा कस्बे में भतीजों ने चाचा को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया
 रबूपुरा मे दलित बेटे ने अपने ही पिता को गोली मारी
 धनपुरा में पड़ोसी खेत मालिक ने किसान की फरसे से काटकर हत्या की
 ककोड़ के गांव हिरनौटी में भूमि विवाद के चलते अब तक दजर्नभर ग्रामीणों की हत्याएं
 जमीन पर कब्जे को लेकर गांव अच्छेपुर में सबर्ण जाति के दो पक्षों में छिड़ी गैंगवार में दजर्नों लोगों की हत्या
 रुस्तमपुर गांव में दो साल पूर्व युवक की गोलीमारकर हत्या
 गांव फलैदा और चंडीगढ़ के किसानों में मेड़ काटने से उपजे विवाद में दो लोगों की हत्या

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