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जमीन के चक्कर में अटके गरीबों के घर

हॉट सिटी में बिल्डरों के लिए जगह है। आलीशान कॉलोनियां खड़ी करने को भी जमीन है मगर गरीबों के लिए सरकारी घर बनाने को एक इंच भूमि नहीं! ऐसा होता तो काशीराम प्रोजक्ट अधर में न लटक गया होता। पहला चरण पूरा हो चुका है। अब दूसरे चरण में भी गरीबों के लिए पंद्रह सौ मकान बनाए जाने हैं। प्रशासन दिन-रात जुटा है मगर गरीबों को बसाने के लिए जमीन नहीं खोज पा रहा। सिर्फ गाजियाबाद की नहीं, मंडल के बाकी जिलों की भी कहानी कुछ ऐसी ही है।


प्रोजेक्ट लगातार लेट होता देख मंडलायुक्त एसके शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों की क्लास ली है। अब तक कांशीराम आवास योजना के दूसरे चरण के लिए जमीन का चयन न होने पर गहरी नाराजगी भी जताई है। दरअसल, मुख्यमंत्री की टॉप प्राथमिकता में शुमार इस प्रोजक्ट का पहला चरण भी लेटलतीफी की भेंट चढ़ चुका है।


गाजियाबाद के प्रताप विहार इलाके में पहली बार में गरीबों के लिए पंद्रह सौ आवास का निर्माण प्रशासन ने कराया है। पहले जमीन मुश्किल से मिली, फिर निर्माण में देरी हुई। अब तक पूरे आवास बनकर तैयार भी हो गए हैं तो बांटने के लिए पर्याप्त संख्या में बीपीएल गरीब ही नहीं मिल पा रहे। हैरत होगी कि पंद्रह सौ कांशीराम आवासों में से सिर्फ साढ़े तीन सौ घरों का आबंटन ही प्रशासन कर चुका है। हालांकि एडीएम सिटी एसके श्रीवास्तव का कहना है कि बाकी बचे आवासों के आबंटन का काम भी तेजी से चल रहा है।


वह टेंशन अभी खत्म नहीं हुई थी कि दूसरे चरण के लिए जमीन खोजने का चिंता और खड़ी हो गई है। देरी होती देख कमिश्नर ने जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर तेजी से इस काम में जुटने की हिदायत दी है। जिसके बाद प्रशासनिक अमला शहर में खाली पड़ी जमीनें खंगालने में जुटा दिखाई दे रहा है।

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