DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

घातक हथियारों की नई कडी जोड़ रहे हैं माओवादी

माओवादी अपना क्षेत्र विस्तार ही नहीं बल्कि हथियारों और घातक विस्फोटकों की अत्याधुनिक श्रृंखला को भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने इसके लिए बाकायद रिसर्च विंग बना रखा है। रोंगटे खड़े कर देने वाले इस विंग के पास वे सारी सुविधाएं और जानकारियां हैं जो सुरक्षा बलों से लोहा लेने के लिए रणनीति तैयार करने में सहायक बनी हैं। आधुनिकतम विस्फोटकों को ईजाद करने के मामले में यह विंग बेहद खतरनाक तरीके से काम कर रहा है।
 
सूत्रों की मानें तो माओवादियों के इस विंग ने कई ऐसे घातक विस्फोटकों और माइंस को और मारक बनाने के लिए ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को ईजाद किया है जो तगड़े सुरक्षा इंतजाम को भी भेदने में कारगर हो सकते हैं। ‘डिजिटल मीटर’ इसका सबसे चौंकाने वाला उपकरण है।

जानकारों के अनुसार आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर हुए हमले में लैण्ड माइंस के विस्फोट में अगर इस डिजिटल मीटर का प्रयोग किया गया होता तो शायद मंजर कुछ और ही होता। उस हमले में सिरीज में लगाए गए क्लेमोर माइंस ब्लास्ट नहीं कर पाए थे। इस कमी को दूर करने के लिए माओवादियों के रिसर्च विंग ने काफी समय तक काम किया और अब उनके पास डिजिटल मीटर है। जानकारों के अनुसार एक सिरीज में लगाए गए क्लेमोर माइंस में एक समान करंट फ्लो कराना इस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की खासियत है। बिहार में भी काफी संख्या में जब्त विस्फोटकों में क्लेमोर माइंस और डिजिटल मीटर की जब्ती की बात पुलिस स्वीकार चुकी है। एक और खरतनाक हथियार उनके हाथ लगा है।

यह है ‘फ्लैश आईईडी’। हाल ही में मुंगेर में माओवादियों के ट्रेनिंग कैम्प से फ्लैस आईडी भी जब्त किए गए हैं। कैमरे के फ्लैश के जरिए इससे भयंकर विस्फोट किया जा सकता है। इसके अलावा माओवादियों के इस विंग के हाथ कई ऐसे केमिकल भी लगे हैं जिनका इस्तेमाल घातक और अचूक विस्फोटकों के रूप में किया जा सकता है। विंग द्वारा तैयार की गयी नई रणनीति के आधार पर विशेषज्ञों की मदद से समय-समय पर माओवादियों को प्रशिक्षित भी किया जाता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:घातक हथियारों की नई कडी जोड़ रहे हैं माओवादी