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विदेशी माँ को मिला बच्चे को पालने का हक़

एक बिनब्याही युवती ने बच्चें को जन्म दिया। सामाजिक रीतियों से बेबस मां ने अपने एक दिन के नवजात को एक अमेरिकन युवती को सौंप दिया। अविवाहित अमेरिकन युवती ने बच्चे को अपनी औलाद की तरह पाला। एक समय ऐसा आया जब अमेरिकन युवती स्वदेश लौटने लगी। अब बच्चे को विदेश ले जाने में उसकी मां की अनुमति की जरुरत पड़ी। मां ने बाकायदा अदालत में आवेदन दे अपने डेढ़ साल के बच्चे को विदेशी युवती को गोद देने की सहमति दी।

पटियाला हाउस स्थित गाजिर्यन जज गुरदीप कुमार की अदालत ने तमाम हालात के मद्देनजर अंग्रेजी मेम को सशर्त बच्चे को अमेरिका ले जाने की इजाजत दे दी है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर जल्द ही रियॉन(बदला हुआ नाम)अपनी अंग्रेजी मां के साथ सात समुन्द्रपार के लिए उड़ान भरेगा।

हुआ यूं कि दाजिर्लिंग(पश्चिमी बंगाल निवासी) निवासी सरोज दॉरजी(बदला हुआ नाम) ने 13 जनवरी 2008 को एक बच्चे को जन्म दिया। लेकिन बिन ब्याही मां बनने के कारण उसने समाज की शर्मिदगी से बचने के लिए अपने एक दिन के बच्चे को सामाजिक कार्य के लिए भारत आई अमेरिका निवासी रिबेका लाईने मोरलॉक को सौंप दिया। परन्तु जब रिबेका स्वदेश लौटने लगी, तो समस्या बच्चे को ले जाने की आई। रिबेका ने सरोज से संपर्क किया। सरोज ने बच्चे को समाज में स्थान दिलाने के लिए रिबेका को बच्चे की कानूनी मां का दर्जा देते हुए गोदनामे पर हस्ताक्षर कर दिए।

30 जुलाई 09 को सुप्रीम कोर्ट ने मामला दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में स्थानान्तरित कर दिया। अदालत ने रिबेका की शिक्षा, सुदढ़ आर्थिक हालात, शारीरिक रिपोर्ट व बच्चे के डेढ़ साल के पालन-पोषण के दौरान विदेशी युवती के व्यवहार का आंकलन किया। साथ ही अदालत ने बच्चे के भविष्य को अहमियत देते हुए बच्चे को अमेरिका ले जाने पर अपनी मोहर लगा दी। हालांकि गोद की रस्म अमेरिकन कानून के तहत ही पूरी की जाएगी। मगर साथ ही शर्त रखी है कि प्रत्येक वर्ष बच्चे के स्वास्थय व पढ़ाई लिखाई की प्रगति रिपोर्ट उसे भारत भेजनी होगी। दूसरा दो साल के भीतर रिबेका को बच्चे को अदालत के समक्ष पेश भी करना होगा।

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