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एनएसडी

हाल में निवेश के बेहतर विकल्प के रूप में एनएसडी (नॉन-कंवर्टबिल डिबेंचर) सामने आया है। इससे पहले यह समझना जरूरी है कि डिबेंचर होता क्या है? यह एक तरह का सर्टिफिकेट होता है कि कंपनी निवेशक को निश्चित अमाउंट देगी। इस पेमेंट में मूलधन पर ब्याज और मैच्योरिटी होने पर पूंजी मिलती है।
डिबेंचर मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं। पूरी तरह से कंवर्टबिल डिबेंचर में निवेशक को ब्याज शुरुआती स्तर पर मिलता है। इसमें प्रिंसिपल अमाउंट लौटाया नहीं जाता, सिवाय इसके कि निवेशक कंपनी में शेयरधारक न हो।
नॉन-कंवर्टबिल डिबेंचरों को इक्विटी या शेयरों में नहीं बदला जा सकता। ये मैच्योरिटी पर निवेशक को प्रिंसिपल अमाउंट अदा करते हैं। पार्शियली कंवर्टबिल डिबेंचर मैच्योरिटी के बाद प्रिंसिपल अमाउंट के साथ कुछ इक्विटी और शेयर भी देते हैं।
एनएसडी दो तरह के विकल्प प्रदान करता है। क्यूमुलेटिव विकल्प में मैच्योरिटी के बाद ब्याज दर और प्रिंसिपल अमाउंट मिलता है। इसके पहले किसी भी तरह की पेमेंट नहीं मिलती। वहीं रोजाना ब्याज के विकल्प में निवेशक को ब्याज समय-समय पर मिलता रहता है। यह क्वार्टरली भी हो सकता है और वार्षिक भी। अगर आप ऐसे फंड की तलाश में है जो आपकी रोजमर्रा की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सके तो फिर वार्षिक विकल्प बेहतर है।
मैच्योरिटी तक रखने पर इसकी आय लांग टर्म कैपिटल गेन के दायरे में आती है। अगर आप टैक्स 30 प्रतिशत वाले टैक्स ब्रैकट में है तो आपके लिए क्यूमूलेटिव विकल्प बेहतर रहेगा।

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