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नए ठिकाने पर

किसी भी शख्स ने अगर नये ऑफिस में काम करना शुरू किया है, तो वहां की कार्य-संस्कृति और सहकर्मियों के साथ तालमेल बैठाना ही पड़ता है। जाहिर है, जो लोग नए माहौल में आसानी से ढल जाते हैं, उनके लिए कोई भी नया दफ्तर ‘नया’ नहीं होता। उन्हें लगता है कि बरसों से यहीं काम कर रहे हैं। दरअसल नई जगह एडजस्ट करने में दिक्कत आने की मुख्य वजह है पिछली नौकरी से इस्तीफा देने के बाद बिताया गया मुक्त जीवन। इससे पार पाना नामुमकिन नहीं है।
नए माहौल में कैसे ढलें?  
ल्ल नए ऑफिस में एडजस्ट होने के लिए जिस चीज की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है, वह है सकारात्मक नज़रिया और आत्म विश्वास। अच्छा हो आप आगे बढ़कर पहल करें, और लोगों से परिचय करके मेलजोल बढ़ाएं। लेकिन ध्यान रहे, आपके ऐसा करने से कोई शख्स अपने काम में ‘डिस्टर्ब’ न हो। जब तक नए ऑफिस की कार्य संस्कृति समझ में न आए, औपचारिक लिबास को तरजीह दें और स्टाफ के साथ मुस्कराहट के साथ पेश आएं। 
ल्ल नए ऑफिस में वक्त की पाबंदी का पालन सख्ती से करें। इससे बॉस और सहकर्मियों पर आपका पहला इम्प्रैशन अच्छा पड़ेगा।
ल्ल नए दफ्तर के साथियों के साथ मीटिंग और बहस में सक्रिय भागीदारी करें। ऑफिस के कामकाज की प्रणाली और माहौल की रीडिंग करें। इससे आपको बाकी लोगों को ठीक से जानने में मदद मिलेगी।
ल्ल जिस काम से आपका कोई लेना-देना न हो, उसमें दखल कतई न करें। बिन मांगे अपनी राय पेश करना भी ठीक नहीं होता। अपने काम से काम रखें, तो ठीक रहेगा।
ल्ल ऑफिस के लोगों के साथ मेलजोल बढ़ाने से आप उन्हें बेहतर समझ सकेंगे। शांत रहकर मेलजोल बनाएं, इस दौरान किसी की आलोचना न करें। सब पर अपनी छाप छोड़ने का प्रयास करें, लेकिन ओवरस्मार्ट न बनें।

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