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राजनीतिक दल छात्र संगठनों पर डाल रहे हैं डोरे

विधानसभा चुनाव को देखते हुए  राजनीतिक दल छात्र संगठनों को रिझाने में जुट गए हैं। उन्हें युवाशक्ति याद आने लगी है।  वहीं छात्र संगठन भी हवा का रूख भांप कर कदम रख रहे हैं। राजनीतिक दलों का मानना है कि छात्र शक्ति पार्टी के लिए मजबूत आधार बन सकती है। छात्र संघों को रिझाने के लिए योजनाएं भी बनाई गई हैं।  छात्रों को पार्टी के एजेंडे से अवगत कराया जा रहा है।

विभिन्न पार्टी के बड़े नेता छात्र संगठनों से संपर्क साधे हुए हैं। हाल में हुए लोकसभा चुनाव में झारखंड छात्र संघ और आदिवासी छात्र संघ के बीच गठबंधन हुआ था। कांग्रेस, भाजपा और झामुमो से जुड़े छात्र संगठनों में भी जोड़-तोड़ का सिलसिला जारी है। छात्र संगठनों में जोड़-तोड़ के लिए राजनीतिक दल के केंद्रीय नेता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्देशन दे रहे हैं। बताते चलें कि  पिछले छात्र संघ चुनाव में आजसू छात्र इकाई और एबीवीपी के बीच गठबंधन हुआ था। चुनाव की रणनीति एबीवीपी के एडवर्ड सोरेन और आजसू के प्रवीण प्रभाकर ने बनाई थी। इसकी बदौलत रांची यूनिवर्सिटी की पांच में से चार सीटों पर आजसू और एबीवीपी के उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया था। आजसू विवि इकाई के छात्र सम्मेलन में खुद पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो ने हिस्सा लिया था और अधिक से अधिक छात्रों को आजसू में शामिल होने की अपील की थी। इसी तरह झाविमो की छात्र इकाई के सम्मेलन में पार्टी के केंद्रीय नेता प्रदीप यादव ने हिस्सा लिया था।

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