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यूपी पावर कारपोरेशन पर 4 करोड़ 62 लाख जुर्माना

ग्रिड से निर्धारित  कोटे से अधिक बिजली का ओवरड्राल कर प्रदेश को रोशन करने की कोशिश बिजली विभाग को महंगी पड़ गयी है। केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) ने इसे गंभीरता से लेते हुए यूपी पावर कारपोरेशन पर चार करोड़ 62 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। नार्दर्न रीजन लोड डिस्पैच सेंटर की शिकायत संबंधी याचिका का निस्तारण करते हुए सीईआरसी ने आगामी 15 नवम्बर तक यह राशि जमा करने का निर्देश दिया है।


सुनवाई के दौरान पावर कारपोरेशन की ओर से मुख्य अभियंता वीपी त्रिवेदी आदि ने यह तर्क दिया कि 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदने की निविदा प्रकिया जारी है तथा मांग और आपूर्ति में भारी अंतर के कारण प्रदेश के लिए कोटे से अधिक बिजली का ओवरड्राल अपरिहार्य है। नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रमोददेव की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय पीठ ने इस तर्क को खारिज करते हुए पावर कारपोरेशन को एक माह में 462 टाइम ब्लाक में ओवरड्राल के लिए दोषी माना और बार-बार ग्रिडकोड के उल्लंघन के लिए इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 142 के तहत अधिकतम पेनाल्टी एक लाख रुपये प्रति उल्लंघन की दर से कुल चार करोड़ 62 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया। एनआरएलडीसी ने शिकायत की थी कि यूपी ने ओवरड्राल की आदत बना ली है जिससे कई बार 49.2 हट्र्ज से कम फ्रिक्वेंसी पर ओवरड्राल के कारण ग्रिड को गंभीर खतरा उत्पन्न हो चुका है। कई बार चेतावनियों के बावजूद ग्रिड से 1500 से 2000 मेगावाट तक ओवरड्राल जारी रखा गया।

यूपी पावर कारपोरेशन ने सरप्लस बिजली वाले पंजाब,  जम्मू व हिमाचल प्रदेश से द्विपक्षीय समझौते के तहत बिजली खरीदने की कोशिश नहीं की। कारीडोर न मिलने के तर्क को भी खारिज करते हुए सीईआरसी ने कहा कि इसके इंतजाम समय रहते सुनिश्चित करना पावर कारपोरेशन की जिम्मेदारी है। इससे पहले भी दंडात्मक कार्रवाई होने के बावजूद ग्रिडकोड का उल्लंघन एक्ट का गंभीर अतिक्रमण है जिस पर अधिकतम अर्थदंड लगाने का कोई विकल्प नहीं है।

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