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सूखे से निपटने के लिए नरेगा पर जोर

सूखे से निपटने के लिए सरकार का पूरा ध्यान अब नरेगा की योजनाओं पर है। सूखाग्रस्त जिलों में सैम्पल टेस्ट के बाद यह तस्वीर साफ हो चुकी है कि कई पंचायतों में नरेगा की एक से अधिक योजनाएं नहीं चल रहीं। राज्य सरकार हर हाल में इसे सुनिश्चित कराने में भिड़ गयी है। इसकी जिम्मेवारी सूबे के सीनियर आईएएस अफसरों के कंधों पर डाल दी गयी है। अगले चार महीने तक वे जिलों में जाएंगे और गांवों में जाकर यह देखेंगे कि योजनाएं नीचे स्तर तक पहुंची या नहीं। कोशिश यही है गरीब बस्तियों और गांव खासकर महादलितों तक योजनाएं पहुंच जाएं।

अधिकारियों के अनुसार सूखे से निपटने में नरेगा सबसे कारगर हथियार है। लोगों को रोजगार मिलेगा तो उनके पास पैसे आएंगे और फिर वे अनाज खरीद सकते हैं। लेकिन जब योजनाएं ही नहीं चलेंगी तब ऐसे में स्थितियां और बिगड़ सकती हैं।
सरकार ने सभी सूखाग्रस्त जिलों के डीएम को कहा है कि हर हाल में पंचायतों में नरेगा की कम से कम दो-दो योजनाएं सुनिश्चित कराएं। जिलों के प्रभारी सचिव हर महीने जाकर इसका आकलन करेंगे। खासबात यह है कि मुख्यसचिव ने सचिवों को कहा है कि जिलों में अधिकारियों को गाइड भी करें ताकि योजनाओं को कारगर ढंग से कार्यान्वित कराया जाए। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार  जिन जिलों में सूखे के कारण स्थितियां बिगड़ेंगी वहां नरेगा की दो से अधिक योजनाएं भी ली जा सकती हैं।

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  • Web Title:सूखे से निपटने के लिए नरेगा पर जोर