DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कब तक चलेगा पटना-मुजफ्फरपुर फोर लेन का ड्रामा

कब तक चलेगा पटना-मुजफ्फरपुर फोर लेन निर्माण का ड्रामा। एनएचडीपी -3 के तहत इसकी निर्माण राशि टॉल के माध्यम से वसूली जानी है।

और इसी लफड़े के कारण पांच वर्षो से टेंडर दर टेंडर होता रहा है पर बन नहीं रहा। वर्ष 2004 के  जून से केन्द्र सरकार इस सड़क के निर्माण की घोषणा कर रही है। अब 2009 बीतने को है और फिर एक बार फोर लेन बनाने का सपना ही दिखाया जा रहा है। पहले बीओटी  पर टेंडर हुआ। फिर एनयूटी मोड पर टेंडर हुआ और अब (गुरुवार को) केन्द्र सरकार ने डीबीएफओटी मोड पर निर्माण करने का निर्णय किया है। बावजूद अधिकारियों का कहना है कि जब तक सरकार इपीसी मोड के आधार पर इसका निर्माण नहीं करायेगी, फोन लेन बनना संभव नहीं दिख रहा।


वर्ष 2004 के जून महीने में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसके निर्माण की जिम्मेवारी ली।  सितम्बर 2004 बीओटी मोड पर टेंडर निकाला। टेंडर के डेट दो बार बढ़ाये गये पर एक भी कंपनी निर्माण के लिए आगे नहीं आयी। तब सूब के हालात को देखते हुए कोई भी एजेंसी टॉल वसूली का भार लेने को तैयार नहीं थी। इस कशमकश के बीच वर्ष 2005 में सूबे में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। उसके बाद सूबे में नीतीश सरकार आयी। दिसम्बर 2005 में संसद में तत्कालीन केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री टीआर बालू ने घोषणा की कि राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी)-3 के तहत इसे फोन लेन बनाने की मंजूरी दी गई है। बीओटी के आधार पर इसका निर्माण होगा।  एनएचएआई ने फिर बीओटी मोड पर अंतर्राष्ट्रीय निविदा निकाली। लागत 458 करोड़ रुपए तय की गई पर कोई एजेंसी आगे नहीं आयी। इसके बाद एनएचएआई ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दी।


इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री नन्दकिशोर यादव ने कड़ी आपत्ति दर्ज की। दोनों दिल्ली गये और केन्द्र सरकार को पूरे मामले की विस्तृत जानकारी दी। फिर केन्द्र गंभीर हुआ और अगस्त 2009 में एनएचएआई को एनयूटी (टॉल) के आधार पर टेंडर करने का निर्देश दिया। इस पद्धति से परियोजना की लागत 671 करोड़ रुपए तय की गई। 30 महीने मे निर्माण समय तय किया गया। तय हुआ कि साढ़े बारह वर्षो में एनएचएआई टॉल वसूल कर संबंधित एजेंसी को राशि चुकायेगी। टेंडर हुआ और गैमन इंडिया और सीएण्डसी एजेंसी निर्माण के लिए आगे आयी। पर मामला फिर अटक गया। अब केन्द्र सरकार ने डीबीएफओटी मोड निर्माण की मंजूरी दी है।

सड़क निर्माण की चार पद्धति:
  1. बीओटी (बनाओ-चलाओ-निर्माण लागत वसूलो और तब सरकार को स्थानांतरित करो)
   2. एनयूटी (एजेंसी द्वारा निर्माण और सरकार द्वारा पैसा वसूल एजेंसी को देना)
   3. डीबीएफओटी (एजेंसी द्वारा डिजाइन- निर्माण- फाइनेंस और लागत वसूली, तब सरकार को हस्तांतरण)
   4. इपीसी (सामान्य प्रक्रिया- एजेंसी बनाती जाएगी और सरकार पैसा देती जाएगी)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कब तक चलेगा पटना-मुजफ्फरपुर फोर लेन का ड्रामा