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बिहार में बिजली की भारी किल्लत

 एनटीपीसी के तीन बिजलीघरों के साथ-साथ कांटी बिजलीघर में उत्पादन ठप होने और पनबिजली परियोजनाओं में उत्पादन घट जाने के बाद बिहार जबरदस्त संकट की चपेट में आ गया है। सूबे के बड़े हिस्से में बिजली के लिए हाहाकार है। हालांकि बिजली बोर्ड रोटेशन सिस्टम से संकट को दूर करने की पूरी कोशिश में है। इसके लिए दूसरे स्नोत से महंगी बिजली की भी खरीद हो रही है।


केन्द्रीय प्रक्षेत्र से 1631 मेगावाट आवंटन की जगह मात्र 738 मेगावाट बिजली की ही आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा बरौनी बिजलीघर से 60 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है। बिजली बोर्ड सात से दस रुपए प्रति यूनिट की दर से 180 मेगावाट बिजली की खरीद इस किल्लत को दूर करने की कोशिश में जुटा है। इस प्रकार सूबे में मात्र 978 मेगावाट बिजली की उपलब्धता है जबकि जरूरत तीन हजार मेगावाट पहुंच चुकी है।


 उपलब्ध बिजली में से राजधानी पटना को 350 मेगावाट की आपूर्ति की जा रही है जबकि रेलवे और नेपाल को 200 मेगावाट और अन्य अनिवार्य सेवाओं को 150 मेगावाट की आपूर्ति की गई। ऐसे में शेष सूबे के लिए मात्र 278 मेगावाट की ही उपलब्धता रह गई है। इतनी ही बिजली में 37 जिलों को आपूर्ति की जा रही है।


बिजली बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार एनटीपीसी के तालचर, फरक्का और कहलगांव बिजलीघरों में 500-500 मेगावाट की एक-एक यूनिट ठप हो गई है। कांटी बिजलीघर से भी उत्पादन बंद है। इसके अलावा पनबिजली परियोजनाओं ताला, चुखा और रंगीत में भी उत्पादन कम हो जाने से वहां की आपूर्ति घट गई है। ऐसे में सेन्ट्रल सेक्टर से आवंटित बिजली की आधी भी बिहार को नहीं मिल रही।

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