DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बाढ़ का मुद्दा सब पर भारी

लोकसभा चुनाव में वैसे तो मुद्दों की बाढ़ रहेगी लेकिन कोसी की विध्वंसकारी बाढ़ सब मुद्दों पर भारी पड़ेगी। यह मुद्दा अभी भी ज्वलंत बना हुआ है क्योंकि कोसी के विध्वंसक प्रभाव का असर पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। बाढ़ के मुद्दे के अलावा कृषि, सड़क, रलवे, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षेत्रीय पिछड़ापन, पेयजल, इंदिरा आवास, नरगा आदि से भी उम्मीदवारों को दो-चार होना पड़ेगा।ड्ढr राघोपुर के अनिरूद्ध यादव का कहना है कि बाढ़ के बाद पुनस्र्थापन का कुछ भी काम अभी तक नहीं हुआ है। ग्रामीण सड़क निर्माण, यातायात एवं रोगार के साधन भी नदारद हैं। कोसी तटबंध के भीतर के गांव खुशियाली (मरौना) के सरो कुमार कोसी नदी को सभी तकलीफों की जड़ बताते हुए कहते हैं कि अब तक गलत प्रबंधन के कारण तटबंध के भीतर के लोग नारकीय जीवन भोग रहे हैं। सुरक्षा बांध का काम अब तक चालू नहीं होने से लोगों में निराशा है। शंकरपुर (सिंहेश्वर) के पिंकू कुमार शिक्षक नियोजन में व्यापक गड़बड़ी, वित्तरहित शिक्षा नीति, सरकारी कार्यो में गड़बड़ियां तथा पंचायत स्तर तक फैले भ्रष्टाचार को चुनाव का अहम मुद्दा मानते हैं। सातनपट्टी (वीरपुर) के उमेश प्रसाद मेहता इंदिरा आवास की गड़बड़ियों सहित ग्रामीण सड़कों की उपेक्षा को मुख्य चुनावी मुद्दा मानते हैं। सुपौल सदर प्रखंड के जीवन पाठक महंगाई एवं आतंकवाद को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हैं। बहुअरवा (किशनपुर) के महेश कुमार साह तथा रतौली जरौली (पिपरा) के नरश सिंह गांव में बिजली की नामौजूदगी को लेकर आक्रोश प्रकट करते हुए हैं। उनके मुताबिक सबसे बड़ा मुद्दा बिजली बनेगी। जबकि मरौना के भूपेन्द्र प्रसाद यादव तटबंध के भीतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा के बिगड़ते हालात को चुनावी मुद्दा बताते हैं। सुपौल जिला मुख्यालय के मो. हातिम की नजर में चुनाव का प्रमुख मुद्दा घूसखोरी एवं भ्रष्टाचार रहेगा। प्रतापगंज के शंभू कुमार बाढ़ में ध्वस्त प्रतापगंज-फारबिसगंज रलवे लाइन को अब तक चालू नहीं किये जाने पर आक्रोश प्रकट करते हैं।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बाढ़ का मुद्दा सब पर भारी