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महिलाओं की समस्याएं आज भी हैं: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने आज आहवान किया कि स्वामी दयानंद सरस्वती के बताये सिद्धांतों पर चलकर समाज, राष्ट्र और विश्व को खुशहाल और समद्ध बनाया जा सकता है।
   
अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि जिन कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए स्वामी दयानंद ने जागरूकता अभियान चलाया। उस प्रकार की कुछ कुप्रथायें आज भी समाज में है, जिन पर लगाम बेहद जरूरी है।

राष्ट्रपति ने स्वामी दयानंद द्वारा बहु विवाह, सती प्रथा और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ किए गए प्रयासों को याद करते हुए कहा कि आज भी महिलाओं की अनेक समस्याएं हैं, जो देश और समाज के लिए चिंता की बात है।
    
उन्होंने कहा कि लिंग परीक्षण के लिए उन्नत मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। कन्या को जन्म लेने से रोकने से सामाजिक संतुलन बिगड़ जायेगा और अनेक विकृतियां जन्म लेंगी।
    
प्रतिभा पाटिल ने कहा कि बाल विवाह जैसी बुराई के प्रति समाज को जागरूक किए जाने की जरूरत है और समय पूर्व शादी से अनेक बुराई जन्म लेती हैं, जो आर्थिक और सामाजिक प्रगति में बाधक होती है।
    
उन्होंने कहा कि स्वामी जी का मानना था कि समाज की बेहतरी के लिए महिलाओं का सशक्त होना बेहद जरूरी है। इसलिए उन्होंने महिलाओं की शिक्षा का मार्ग खोलने का महती कार्य किया।

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