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रक्सौल, मुंगेर व बोधगया में पवन ऊर्जा की खोज

 सूबे में पवन ऊर्जा की संभावनाओं की तलाश के लिए तीन क्षेत्रों का चयन  किया गया है। अब तक पवन ऊर्जा के मामले में बिहार शून्य पर खड़ा है, लिहाजा इस नई पहल से बड़ी संभावनाओं की तलाश शुरू हुई है। हालांकि इसके पहले भी तीन क्षेत्रों का चयन किया गया था और वहां पवन चक्की लगाने की कसरत जारी है। विशेषज्ञों की नजर में कुछ मौसम में बिहार पवन ऊर्जा के लिए बेहतर स्थान हो सकता है। खासकर पहाड़ी और पवन की बहुलता वाले क्षेत्रों पर ब्रेडा की नजर है। लंबे अध्ययन के बाद उसने तीन स्थानों का चयन किया है। 


 ब्रेडा से मिली जानकारी के अनुसार रक्सौल, पीरपहाड़ी (मुंगेर) और बोधगया में पवन ऊर्जा की संभावनाओं की खोज शुरू होगी। केन्द्र सरकार ने भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इसके पहले वैशाली के लालगंज, जमुई के सिमुलतला और कैमूर के अधौरा में पवन ऊर्जा की संभावनाओं की खोज शुरू की गई है। ऊर्जा विभाग की मौजूदा कोशिश पटरी पर आई तो अगले वर्ष के शुरू में बिहार पवन चक्की लगाने की दिशा में पहला कदम बढ़ा देगा।
खोज का दायित्व चेन्नई की सीवेट कंपनी को सौंपा गया है जो इस संबंध में तमाम तकनीकी उपकरण उन क्षेत्रों में लगाएगी। इसी महीने की 10 व 11 तारीख को चेन्नई में बिहार के अधिकारियों के साथ कंपनी की बैठक होनी है। बैठक में पवन ऊर्जा की संभावनाओं की तलाश और उससे सम्बद्ध अन्य योजनाएं बनाई जाएगी। पवन चक्की लगाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना पर काम भी हो रहा है। बताया जाता है कि शीघ्र ही विदेशों से उपकरणों की आपूर्ति भी शुरू होगी।
  
‘यह प्रारंभिक कोशिश है और इसे लेकर सरकार उत्साहित है। हम पवन ऊर्जा की तमाम संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। तीन स्थानों पर पहले से काम हो रहा है जबकि तीन नए स्थानों का भी चयन किया गया है।’
 जीवन कुमार सिन्हा, निदेशक, ब्रेडा

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