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हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा से बरी

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हत्या के आरोपित लहरू उर्फ राकेश को सत्र न्यायालय द्वारा मिली आजीवन कारावास की सजा से बरी कर दिया है। यह निर्णय न्यायमूर्ति सरोज बाला एवं न्यायमूर्ति एससी अग्रवाल की खण्डपीठ ने लहरू की आपराधिक अपील को स्वीकार करते हुए पारित किया है।

अपील के अनुसार राम सिंह यादव ने 22 सितम्बर 1999 को थाना बलुआ जिला चन्दौली में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी जो भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 व 201 के अन्तर्गत दर्ज हुई थी। इसमें आरोप था कि लहरू ने अपने पड़ोसी के दस वर्षीय पुत्र जितेन्द्र यादव के साथ 21 सितम्बर की शाम देखा गया था। सुबह खेत में जितेन्द्र की लाश पाई गई थी। लहरू पर जितेन्द्र की हत्या का आरोप लगा था।

इस मामले पर सुनवाई के बाद चन्दौली के सत्र न्यायाधीश ने 17 फरवरी 2001 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। अपीलकर्ता के अधिवक्ता सुनील सिंह का तर्क था कि गवाहों के बयान में भिन्नता के साथ-साथ इस घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। पक्षकारों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सत्र न्यायाधीश द्वारा आजीवन कारावास की दी गई सजा को रद कर दिया है।

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