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23 साल से नहीं लिया वेतन, शासन सख्त

खबर पढ़कर चौंकना लाजिमी है, लेकिन है यह सच। प्रदेश के एक सीनियर पीसीएस अधिकारी 23 साल से बिना वेतन लिए सरकारी नौकरी कर रहे हैं। कानपुर देहात के सीडीओ पद पर तैनात जसवंत सिंह से इस बाबत कई बार जवाब मांगा गया मगर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अब प्रदेश शासन ने उनसे पूछा है कि आखिर वह अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे कर रहे हैं। शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि इस बार उन्होंने स्पष्टीकरण नहीं दिया तो माना जाएगा कि इस सम्बन्ध में उन्हें कुछ नहीं कहना और प्रकरण में नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर दी जाएगी। 

जसवंत सिंह को एक जनवरी 1986 को समयमान वेतनमान मिला था, लेकिन शासन के इरला चेक अनुभाग में नियुक्ति का कोई रिकार्ड न होने से उनका वेतन निर्धारण नहीं हो पाया। इसके बाद इरला चेक अनुभाग से न तो उनकी वेतन पर्ची जारी नहीं हुई और न ही उन्होंने इसके लिए प्रयास किए। 17 अगस्त 09 को शासन के उपसचिव शैलेन्द्र कुमार ने डीएम देहात और देहात ट्रेजरी के साथ सीडीओ को भी एक पत्र भेजा जिसमें उनसे पूछा गया है कि एक जनवरी 1986 से अब तक वह कहाँ-कहाँ रहे। उनसे पदवार विवरण के साथ पदग्रहण व पद छोड़ने का ब्योरा भी माँगा गया है।

यह भी पूछा गया है कि तब से अब तक उन्होंने डीडीओ के जरिए या खुद डीडीओ की हैसियत से कोई भत्ते प्राप्त किए या नहीं। यह पत्र शासन के नियुक्ति विभाग को भी भेजा गया है। पत्र में दिए गए विवरण से साबित होता है कि1986 से उनकी वेतन पर्ची जारी नहीं हुई और बिना वेतन पर्ची के किसी अधिकारी को वेतन नहीं मिलता। जब भी अधिकारी का एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर होता है तो इरला चेक से वेतन पर्ची और संबंधित ट्रेजरी से एलपीसी जारी होती है।

इससे पहले शैलेन्द्र कुमार ने ही अनु सचिव के पद पर रहते हुए 2 फरवरी 2000, 26 फरवरी 2003, 18 अगस्त 1994, सितम्बर 1994, 10 जून 1995, 11 अप्रैल 1996, 30 जून 98, 5 नवम्बर 1998 समेत कई पत्र नियुक्ति सचिव व जसवंत सिंह को भेजे और हर बार इनका विवरण माँगा। न तो नियुक्ति विभाग से कोई विवरण भेजा गया और न खुद जसवंत सिंह ने कोई रिकार्ड भेजा। इसके चलते 23 सालों से वेतन नहीं निकला।

देहात के ट्रेजरी अफसर एनके सिंह से इस बाबत पूछने पर उन्होंने माना कि उनकी वेतन पर्ची और एलपीसी नहीं मिली। इससे पहले गोरखपुर व मिर्जापुर में उनकी तैनाती रही है, वहाँ के ट्रेजरी अफसरों ने भी बताया कि जसवंत सिंह का वेतन उनके यहाँ से कभी नहीं निकला। खुद जसवंत सिंह से इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने फोन काट दिया।

नियुक्ति अनुभाग ने फिर एक पत्र जारी कर उनसे कहा है कि कई बार लिखने के बाद भी उन्होंने अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं। विशेष सचिव एके सिंह राठौर ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि 23 सालों से बिना वेतन के वे अपने व अपने परिवार का भरण पोषण किस प्रकार कर रहे हैं।

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